गजब: मनरेगा में भी नहीं रोजगार। सौ दिन के बजाय मात्र 32 दिन काम। बेरोजगारी भत्ता किसी को नहीं

मनरेगा में भी नहीं रोजगार। सौ दिन के बजाय मात्र 32 दिन काम। बेरोजगारी भत्ता किसी को नहीं

उत्तराखंड। मनरेगा के अंतर्गत 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई है। लेकिन उत्तराखंड में ग्रामीणों को 100 दिन के बजाय मात्र 32 दिन का ही औसतन रोजगार मिल पा रहा है।बेरोजगारी की हालत यह है कि मनरेगा के तहत उत्तराखंड में 11 लाख 26 हजार से भी अधिक जॉब कार्ड धारक हैं लेकिन अगर पिछले वित्तीय वर्ष की बात करें तो सिर्फ 22000 लोगों को ही पूरे 100 दिन का रोजगार मिल पाया। उत्तराखंड में श्रमिकों की संख्या 18.50 लाख है। इसमें से भी एक्टिव कार्ड धारक 7.13 लाख है और श्रमिक 10 लाख हैं।

सौ दिन का तो काम नही, दो सौ दिन का प्रस्ताव

उत्तराखंड सरकार ने हालांकि केंद्र सरकार को जुलाई में 200 दिन का रोजगार देने का प्रस्ताव भेजा है और उसमें खेती किसानी तथा मत्स्य पालन को भी जोड़ने का आग्रह किया है लेकिन जब सरकार 100 दिन में से ही केवल 32 दिन का ही रोजगार दे पा रही है तो फिर 200 दिन की स्वीकृति मिल भी जाएगी तो क्या फायदा!

पिछले साल और घटा रोजगार

अपेक्षा 4000 कम लोगों को रोजगार मिला। पिछले साल 22000 लोगों को रोजगार मिला था, जबकि उससे पिछले साल 26000 लोग मनरेगा के तहत रोजगार प्राप्त कर पाए थे। लॉकडाउन के चलते प्रवासी वापस लौट रहे हैं और महिला स्वयं सहायता समूह भी जॉब कार्ड बनवा रहे हैं। इससे इस माह के अंत तक स्थिति साफ हो जाएगी कि उत्तराखंड में कितने ऐसे बेरोजगार हैं जो मनरेगा के तहत रोजगार करना चाहते हैं।

काम नही तो भत्ते का प्राविधान। मिला किसी को नही

मनरेगा के अंतर्गत यह प्रावधान है कि यदि किसी व्यक्ति को काम मांगने के 15 दिन के भीतर रोजगार नहीं मिलता है तो उसे 16 दिन से बेरोजगारी भत्ता मिलने लगेगा। वह ग्राम विकास अधिकारी के पास आवेदन करके और काम मांगने के प्रमाण पत्र प्रस्तुत करके बेरोजगारी भत्ता हासिल कर सकता है। लेकिन उत्तराखंड में किसी को भी अभी तक बेरोजगारी भत्ता नहीं मिला है। यदि काम मांगने के बावजूद काम नहीं मिला तो पहले 30 दिन के लिए कुल मजदूरी के 25% का भत्ता मिलता है। यानी वर्तमान दर के हिसाब से बेरोजगार व्यक्ति को ₹50 प्रतिदिन मिलेगा। मनरेगा के राज्य समन्वयक मोहम्मद असलम के अनुसार मई अंत तक 13626 नए मनरेगा कार्ड बनाए जा चुके थे जिनमें से 9220 लोगों को रोजगार दिया गया है।

लौटे प्रवासी मांग रहे काम

लॉकडाउन के बाद गांव लौटे प्रवासी बड़ी संख्या में जॉब कार्ड बनवा रहे हैं। मनरेगा केंद्र सरकार की योजना है और इस योजना के अंतर्गत जितने भी लोग काम करना चाहते हैं उन सब को साल में 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई है किंतु इसके बावजूद उत्तराखंड सरकार केंद्र सरकार से पैसा मिलने के बावजूद इतनी सुस्त है कि 100 दिन का रोजगार भी नहीं दे पा रही है। यदि उत्तराखंड के बेरोजगार लोगों ने काम न दिए जाने पर बेरोजगारी भत्ते की मांग शुरू कर दी तो फिर सरकार को बिना किसी काम के ₹50 बेरोजगारी भत्ता देना पड़ेगा।

उत्तराखंड मे मनरेगा का इतिहास

उत्तराखंड में मनरेगा योजना वर्ष 2006 में 3 जिलों में लागू की गई थी तथा वर्ष 2009 में यह उत्तराखंड के सभी जिलों में लागू हो गई थी। विभिन्न सरकारी विभागों में समन्वय स्थापित करके विभिन्न प्रकार के लेबर कार्य मनरेगा के माध्यम से कराए जा सकते थे लेकिन इस योजना पर सरकार का ध्यान नहीं है। इसके अलावा पलायन से जूझ रहे गांव में मनरेगा के तहत विभिन्न योजनाएं शुरू की जा सकती थी किंतु इस ओर भी ध्यान ना होने से पलायन बढ़ता ही चला गया है।

जनवरी में सरकार ने चार लाख से अधिक बीपीएल परिवारों को मनरेगा से हर हाल में 100 दिन का रोजगार देने का संकल्प जताया था लेकिन इस दिशा में भी सरकार का संकल्प हवा हवाई ही साबित हो रहा है। लाॅकडाउन के बाद बड़ी संख्या में वापस लौटे प्रवासी मनरेगा के अंतर्गत जॉब कार्ड बना रहे है उनके लिए रोजगार की व्यवस्था करना भी एक बड़ी चुनौती है।

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