बड़ी खबर: दून के PPP हॉस्पिटलों में बड़ा फर्जीवाड़ा। DM छापे में डॉक्टर गायब, फर्म पर जुर्माना

देहरादून,  जुलाई 2025 – देहरादून में पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर संचालित 12 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (Urban PHC) में मंगलवार सुबह जिला प्रशासन द्वारा एक साथ की गई छापेमारी में भारी अनियमितताएं उजागर हुई हैं। जिलाधिकारी सविन बंसल के नेतृत्व में 4 प्रशासनिक टीमों ने एक साथ अलग-अलग अस्पतालों में दबिश दी।

इन औचक निरीक्षणों में डॉक्टर, एएनएम, लैब टेक्नीशियन और स्टाफ गायब मिले। मरीजों के लिए बैठने की व्यवस्था नहीं थी, कई जगह टीकाकरण में जरूरी कोल्ड चैन जनरेटर तक नहीं मिले। दवाएं अधूरी थीं, तो कई अस्पताल कालकोठरी जैसे हालातों में चल रहे थे।

DM ने ₹5 लाख का जुर्माना ठोका, टर्मिनेशन की सिफारिश

जिलाधिकारी ने अस्पतालों की लचर व्यवस्था को गंभीर मानते हुए प्राइवेट फर्म अक्षांस/चित्रांश JVK प्रा. लि. पर ₹5 लाख का प्रारंभिक जुर्माना लगाया है और कंपनी के अनुबंध को टर्मिनेट करने की सिफारिश राज्य सरकार के मुख्य सचिव को भेजी है।

कहां-कहां हुई छापेमारी?

  • DM सविन बंसल: जाखन और गांधीग्राम PHC
  • CDO अभिनव शाह: चूना भट्टा, अधोईवाला, कारगी
  • SDM सदर हरी गिरी: रीठामंडी, बकरालवाला, खुड़बुड़ा, सीमाद्वार
  • SDM मुख्यालय अपूर्वा सिंह: दीपनगर, माजरा, बीएस कॉलोनी

सुबह 9 बजे से शुरू हुई इस छापेमारी से स्वास्थ्य विभाग और प्राइवेट ऑपरेटरों में हड़कंप मच गया।

प्रमुख खामियां जो सामने आईं:

  • डॉक्टर और स्टाफ नदारद
  • एएनएम और लैब टेक्नीशियन सिर्फ नाम में दर्ज
  • बायोमेट्रिक उपस्थिति फर्जी
  • दवाओं का स्टॉक अधूरा
  • बायोमेडिकल वेस्ट का गलत निस्तारण
  • बिजली जाने पर दवाएं खराब होने की स्थिति
  • RO सिस्टम बंद, वॉशबेसिन में पानी नहीं
  • महिला व बच्चों के लिए कोई विशेष इंतजाम नहीं
  • टीकाकरण, OPD और इमरजेंसी रजिस्टर अपडेट नहीं
  • सफाई व्यवस्था बेहद खराब, दीवारों पर जाले

DM ने दिए सख्त निर्देश

DM सविन बंसल ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी अस्पतालों का तीन महीने का बायोमेट्रिक डेटा प्रस्तुत किया जाए और जल्द से जल्द स्टाफ की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। साथ ही हर PHC में दवा, उपकरण, बैठने की व्यवस्था, जनरेटर और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की जाए।

मुख्य विकास अधिकारी का निरीक्षण

CDO अभिनव शाह ने चूना भट्टा, अधोईवाला और कारगी में गंभीर खामियों को देखते हुए प्रबंधकों से जवाब तलब किया। उन्होंने कहा कि जिन अस्पतालों में मानक नहीं पाए गए, उनके खिलाफ भारी भरकम आर्थिक दंड की तैयारी की जा रही है।

जनता की शिकायतें हुईं साबित

डीएम को लगातार शिकायत मिल रही थीं कि PPP मोड पर चल रहे अस्पतालों में स्टाफ की कमी, बाहर से दवाएं लिखना, सफाई व्यवस्था की बदहाली और पैथोलॉजी जांचों में हेराफेरी हो रही है। आज की छापेमारी में ये शिकायतें पूरी तरह सही साबित हुईं।

जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई से हड़कंप

इस छापेमारी से स्पष्ट हो गया है कि PPP मोड पर चल रहे शहरी अस्पतालों में गंभीर लापरवाही हो रही थी। जिला प्रशासन ने जिस तरह से योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की है, उससे अब स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद की जा रही है।

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