एक्सक्लूसिव : इधर राजाजी पार्क में जंगल राज ! उधर लाॅकडाउन मे बड़े अफसर

अनुज नेगी देहरादून।राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क के गोहरी रेंज मे तैनात रेंज अधिकारी का ख़ौफ़ इतना पसरा हुआ है, की उन्हें किसी की भी परवाह नही। नियमो को तोड़ने की कला में पारंगत रेंज अधिकारी धीर सिंह का कारनामा आज फिर सुर्खियों में रहा। 84 कुटी में तैनात वन आरक्षी के पत्र प्रकरण में तीन […]

अनुज नेगी
देहरादून।राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क के गोहरी रेंज मे तैनात रेंज अधिकारी का ख़ौफ़ इतना पसरा हुआ है, की उन्हें किसी की भी परवाह नही। नियमो को तोड़ने की कला में पारंगत रेंज अधिकारी धीर सिंह का कारनामा आज फिर सुर्खियों में रहा। 84 कुटी में तैनात वन आरक्षी के पत्र प्रकरण में तीन लाख रुपये मांगने के आरोपित रेंजर ने खुद ही वन आरक्षी को हटा दिया। सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर कैसे उन्होंने इस संवेदनशील मामले में कार्यवाही की। जबकि वह खुद ही वन आरक्षी द्वारा आरोपित किये जा चुके है।

वहीं कर्मचारी संगठन के विरोध के बावजूद भी अब तक नींद में सो रहे महकमे ने जांच तक शुरू नही की। सूत्रों की माने तो रेंज अधिकारी व अनुभाग अधिकारी अजीत सोम की ऊंची पँहुच के चलते ही अब तक जांच शुरू नही हो सकी है। वन्ही यमकेश्वर विधायक द्वारा तत्कालीन निदेशक को कार्यवाही हेतु पत्र लिखे जाने के बाद भी कुछ न होना इनकी ऊंची पँहुच को साबित करता है

क्या है मामला

कुछ दिनों पूर्व 84 कुटी के वन आरक्षी ने गोहरी रेंज के रेंजर धीर सिंह व सेक्सन इंचार्ज अजीत सोम पर 84 कुटी के राजस्व से तीन लाख रुपये प्रतिमाह देने का आरोप लगाया था। तमाम संघठनो की नाराजगी के बाद तत्कालीन निदेशक पीके पात्रो ने इसमें कठोर कार्यवाही का आश्वासन  दिया था, मगर अपने तबादले तक वो सबको सिर्फ आश्वासन की चाशनी में डुबोते रहे। वहीं अब तक कोई उच्चस्तरीय जांच न होना साबित करता है कि महकमे में सब कुछ ठीक नही है।
वही पार्क के कर्मचारी संगठनों की नाकामी के चलते आरोपित खुद ही कार्यवाही कर रहा है। सूत्रों की माने तो अनुभाग अधिकारी अजीत सोम खुद राजाजी के कर्मचारी संगठन से जुड़ा हुआ है, जिसके चलते संगठन सीधे तौर पर आंदोलन की चेतावनी देने के बाद भी बचने का प्रयास कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल है कि कब तक पार्क के आला अफसर इस तरह चैन की नींद सोते रहेंगे। आलाधिकारियों के इस रवैये के फायदा उठा रेंज अधिकारी धीर सिंह व अनुभाग इंचार्ज अजीत सोम मनमानी कार्यवाही पर उतारू हो गए है। संय्या भये कोतवाल तो डर काहे का, की कहावत को सिद्ध करते हुए इन्होंने आरोप लगाने वाले वन आरक्षी को व्हाट्सएप्प के माध्यम से पदमुक्त करने का पत्र जारी कर दिया।

” “यह वन क्षेत्रीयअधिकार का अधिकार होता है,इस मामले की जांच की जायेगी”

ललित प्रसाद टम्टा-वन्यजीव प्रतिपालक राजाजी पार्क

मेरे को केवल व्हाटसअप के माध्यम से चार्ज देने को कहा। अभी तक 84 कुटी का हिसाब फाइनल नही हुआ है। मगर उससे पहले ही दूसरे को एकतरफा चार्ज दे दिया गया। मैं इसकी शिकायत संगठन में करूँगा” ————– नवीन ध्यानी-वन आरक्षी गोहरी रेंज राजाजी पार्क

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