टिहरी कांग्रेस के अध्यक्ष बने राकेश राणा

चन्द्रशेखर पैन्यूली होनहार पूत के होते हैं चिकने पात,कुछ ऐसी ही कहावत सटीक बैठती है, टिहरी गढ़वाल के नए काँग्रेस अध्यक्ष  राकेश राणा पर। प्रतापनगर के उपली रमोली पट्टी के मुखमाल गांव निवासी राकेश राणा ने जितनी कम उम्र में तमाम उपलब्धियां हासिल की,उनमे से कुछ के बारे में जरूर लिखा जाना चाहिए ताकि युवाओं […]

चन्द्रशेखर पैन्यूली

होनहार पूत के होते हैं चिकने पात,कुछ ऐसी ही कहावत सटीक बैठती है, टिहरी गढ़वाल के नए काँग्रेस अध्यक्ष  राकेश राणा पर।

प्रतापनगर के उपली रमोली पट्टी के मुखमाल गांव निवासी राकेश राणा ने जितनी कम उम्र में तमाम उपलब्धियां हासिल की,उनमे से कुछ के बारे में जरूर लिखा जाना चाहिए ताकि युवाओं के लिए उनकी उपलब्धि एक प्रेरणा बन सके।

राकेश राणा को राजनीतिक गुण खून में ही मिली,असल में इनके दादाजी स्व सत्ये सिंह राणा जी उपली रमोली के एक रसूखदार व्यक्ति थे,जो सयाणा साहब के नाम से प्रसिद्ध रहे,राकेश राणा में राजनीति और नेतृत्व के गुण बचपन से ही थे,स्कूली शिक्षा के बाद जब उत्तराखण्ड आंदोलन का चरम समय था यानि 1994 में राकेश स्वामी रामतीर्थ परिसर टिहरी के छात्र थे,उन्ही दिनों राकेश राणा उत्तराखण्ड छात्र युवा संघर्ष समिति प्रतापनगर के अध्यक्ष रहे,उसके बाद वह परिसर के छात्र संघ में लगातार 3 बार चुने गए,फिर 1998 में वे नेहरू केन्द्र के टिहरी जिला अध्यक्ष बने।
फिर 1999 में NSUI के जिला अध्यक्ष बने इस बीच उनके गॉव के नजदीक राइका गरवाण गॉव के पीटीए अध्य्क्ष भी चुने गए,इसके बाद महासचिव युवा कांग्रेस टिहरी गढ़वाल बने,फिर युवा काँग्रेस के जिला अध्यक्ष बने,जिला क्रिकेट संघ सहित जिला युवा समिति के अध्यक्ष बने,इसके बाद राकेश राणा टिहरी गढ़वाल लोकसभा महासचिव चुने गए,साथ ही दूरसंचार मन्त्रालय में नामित किये गए सदस्य बने,इसके बाद हरियाणा राज्य के विधानसभा प्रभारी बने,यूपी युवा कांग्रेस चुनाव में रिटर्निंग ऑफिसर बने,छतीसगढ़ में पार्टी के डीआरओ बने,साथ ही इससे पूर्व प्रतापनगर में बीडीसी सदस्य भी चुने गए,अन्य भी कई यूनियनों में राकेश राणा ने अपनी बुद्धिमानी और तेज तर्रार छवि से कई पदों को सुशोभित किया।

आज जहाँ पूरे देश में कांग्रेस के भीतर नेतृत्व के लिए एक रिक्तता दिख रही है,ठीक ऐन मौके पर उत्तराखण्ड प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह द्वारा,वर्तमान प्रदेश सचिव राकेश राणा जैसे कुशल संगठन कर्ता को जिले की कमान सौंपी गयी जो कि एक बड़ा दूरदर्शी कदम लगता है।

राकेश राणा के समक्ष लोकसभा चुनाव के हार के बाद बेदम पड़ी कांग्रेस में जान फूंककर पँचायत चुनाव में जीतने की बड़ी चुनौती दिखती है,साथ ही पुराने,और नए कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान दिलाने,संगठन में जगह दिलाने की भी बड़ी चुनौती दिखती है।आज राकेश राणा के रूप में काँग्रेस को एक युवा तेज तर्रार जिला अध्यक्ष मिला है।

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