रवि पाल: एक ऐसा युवा प्रत्याशी जो पंचायत चुनाव को बना रहा है विकास यात्रा का दस्तावेज

अमश्यारी, गरुड़ ब्लॉक से रिपोर्ट

जहां एक ओर चुनावी शोर में माइक, बैनर और भीड़ से माहौल गरमाया हुआ है, वहीं अमश्यारी गांव से एक अलग ही ध्वनि सुनाई दे रही है ।

कागज़ों पर विकास की इबारत लिखते एक युवा की। नाम है रवि पाल, जिन्होंने ग्राम प्रधान पद की उम्मीदवारी को प्रचार की होड़ नहीं, एक समर्पित योजना और सेवा का माध्यम बना दिया है।

एक वर्ष की मेहनत, दर्जनों विकास प्रस्ताव

रवि ने बीते एक साल में गांव की ज़मीनी समस्याओं को नजदीक से समझा, उन्हें दस्तावेज़ में उतारा और फिर हर मुद्दे पर ठोस, व्यावहारिक समाधान भी सुझाए।

शिक्षा, स्वच्छता, पेयजल, सड़क, महिला सशक्तिकरण, पारदर्शिता और युवाओं के लिए अवसर — हर विषय पर उन्होंने अध्ययन कर प्रस्ताव तैयार किए हैं।

घरों तक पहुंचा रहे हैं विकास की रूपरेखा

जब रवि प्रचार के लिए घर-घर जाते हैं, तो हाथों में माइक नहीं बल्कि गांव के विकास की पूरी योजना होती है। वे मतदाताओं को नारे नहीं सुनाते, बल्कि पन्ने पलट-पलटकर दिखाते हैं कि वे गांव के कल को कैसे बेहतर बना सकते हैं। उनका कहना है — “ये चुनाव सिर्फ वोट नहीं, गांव के विजन की परीक्षा है।”

किसान मंच प्रदेश अध्यक्ष भी हुए प्रभावित

रवि की गंभीरता और सेवा-भाव से प्रभावित होकर किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष ने उनका समर्थन किया है। अध्यक्ष ने कहा
“जब मैं पहली बार रवि से मिला था, तभी उनके भीतर गांव और समाज के लिए काम करने की आग दिखी। ऐसे युवाओं को न सिर्फ मंच मिलना चाहिए, बल्कि समाज को उनका साथ भी देना चाहिए।”

सोच में बदलाव की पहल

रवि कहते हैं “मैं नाली और सड़क से आगे की बात करना चाहता हूं। मैं सोच बदलना चाहता हूं। अगर मेरी प्रचार सामग्री को कोई पढ़े, तो उसे ये लगे कि यह गांव के भविष्य की किताब है।”

गांव के हर वर्ग से मिल रहा समर्थन

रवि को गांव के युवाओं, किसानों और बुज़ुर्गों से लगातार समर्थन मिल रहा है। युवा कहते हैं — “वह हमारे जैसा सोचते हैं और हमारी ही भाषा में बात करते हैं।”
किसान मानते हैं कि “रवि खेत-खलिहान की असली समस्याएं जानते हैं।”
बुज़ुर्गों का भरोसा है — “यह लड़का बचपन से गांव में रहा है, इसके इरादे साफ हैं, इसे मौका मिलना चाहिए।”

एक प्रत्याशी नहीं, एक विचार बनकर उभर रहे रवि

जिस दौर में चुनाव प्रचार शोर और खर्च में डूबा हुआ दिखता है, उस समय रवि पाल की यह चुपचाप, लेकिन ठोस पहल बदलाव की दिशा में एक बड़ी प्रेरणा बनती दिख रही है।

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