दून में खूंखार नस्लों का बढ़ता खतरा, प्रतिबंध के बावजूद पिटबुल और राटविलर का पालन जारी

देहरादून शहर में खूंखार नस्लों के कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में शहर में 4097 पंजीकृत विदेशी और देशी नस्ल के कुत्ते हैं। इनमें 98 पिटबुल, 148 रॉटविलर, 22 बाक्सर और 656 जर्मन शेफर्ड जैसे खतरनाक कुत्ते भी शामिल हैं। हालांकि भारत सरकार ने मार्च […]

देहरादून शहर में खूंखार नस्लों के कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में शहर में 4097 पंजीकृत विदेशी और देशी नस्ल के कुत्ते हैं। इनमें 98 पिटबुल, 148 रॉटविलर, 22 बाक्सर और 656 जर्मन शेफर्ड जैसे खतरनाक कुत्ते भी शामिल हैं।

हालांकि भारत सरकार ने मार्च 2024 में 23 खतरनाक नस्लों की बिक्री और प्रजनन पर रोक लगाई थी, लेकिन राजधानी दून में इन पर नियंत्रण के प्रयास बेहद कमजोर नजर आ रहे हैं। कई घरों में बिना लाइसेंस के भी ऐसे कुत्ते पाले जा रहे हैं।

विदेशों में जहां पिटबुल जैसे कुत्तों को रिहायशी इलाकों में रखने पर प्रतिबंध है, वहीं दून में ये नस्लें खुलेआम पाली जा रही हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि पिटबुल जब किसी को पकड़ लेता है तो उसके जबड़े लॉक हो जाते हैं, जिससे छुड़ाना लगभग असंभव होता है। हाल ही में तीन दिनों के भीतर दो हमले सामने आने के बाद नगर निगम की निष्क्रियता पर सवाल उठने लगे हैं।

नगर निगम नियमों के अनुसार कुत्ता पालने के लिए लाइसेंस अनिवार्य है, परंतु बड़ी संख्या में लोग बिना पंजीकरण के ही कुत्तों का पालन कर रहे हैं। निगम के वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वरुण अग्रवाल का कहना है कि अगर कोई कुत्ता आक्रामक हो जाता है तो उसकी निगरानी की

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