देहरादून: उत्तराखंड में सड़क और बुनियादी ढांचे के विकास को नई रफ्तार देने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) ने बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है।
इस योजना के तहत राज्य में अगले पांच वर्षों में करीब 74,100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का फोकस गांवों की कच्ची सड़कों को पक्का करने, शहरों को जाम से राहत दिलाने और पर्यटन व औद्योगिक कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर रहेगा।
इस मास्टर प्लान में सबसे बड़ा हिस्सा ग्रामीण सड़कों के सुधार के लिए रखा गया है। योजना के तहत 5,735 किलोमीटर कच्ची सड़कों को पक्का करने पर करीब 55,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
इसका सीधा लाभ लगभग 8.24 लाख लोगों को मिलेगा, जिससे दूरस्थ गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और आवागमन आसान हो सकेगा।
शहरों को जाम से राहत, एलिवेटेड कॉरिडोर और रिंग रोड
शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक की समस्या को देखते हुए सरकार ने 12,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। खासतौर पर देहरादून में रिस्पना-बिंदाल क्षेत्र में एलिवेटेड कॉरिडोर, रिंग रोड और टनल आधारित बाईपास विकसित किए जाएंगे। इससे राजधानी में ट्रैफिक दबाव कम करने और सुगम यातायात व्यवस्था बनाने में मदद मिलेगी।
राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए पर्यटन और औद्योगिक क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को भी प्राथमिकता दी गई है। कुमाऊं में मानसखंड मंदिर माला मिशन के जरिए धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जबकि टिहरी झील क्षेत्र में लेक रिंग रोड को एडवेंचर टूरिज्म के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
इसके अलावा उधम सिंह नगर के औद्योगिक हब को अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जोड़ने की योजना भी शामिल है।
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पुलों का अपग्रेडेशन और जीरो ट्रॉली मिशन
योजना के तहत राज्य के 1200 क्लास-बी पुलों को क्लास-ए में अपग्रेड किया जाएगा, जबकि 91 जर्जर पुलों की मरम्मत की जाएगी। साथ ही जीरो ट्रॉली मिशन के तहत वर्ष 2030 तक ट्रॉली सिस्टम खत्म कर स्थायी पुलों का निर्माण किया जाएगा, जिससे लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।
मास्टर प्लान को छह चरणों में तैयार किया गया है, जिसमें कनेक्टिविटी, सड़क सुरक्षा, शहरी विकास और आधुनिक तकनीक को केंद्र में रखा गया है। भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के उपचार, सड़क सुरक्षा उपायों को मजबूत करने और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान उत्तराखंड के समग्र विकास में अहम भूमिका निभाएगा। इससे न केवल ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच दूरी कम होगी, बल्कि पर्यटन, उद्योग और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे




