आरटीआई लगने से ग्राम प्रधानों व ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों में डर का माहौल ।

इंद्रजीत असवाल
रिखणीखाल। स्थानीय ग्रामीण, सामाजिक व आरटीआई कार्यकर्ता मंगत सिंह रमोला ने सूचना के अधिकार अधिनियम के माध्यम से समस्त ग्राम पंचायत प्रधानों से लोक सूचना अधिकारी, विकास खंड रिखणीखाल से 01 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2021 तक किये गये विकास कार्यो का विस्तृत विवरण व अन्य ज़रूरी सूचना केन्द्र व राज्य वित आदि की सूचना मांगी है। जो कि एक संवैधानिक अधिकार भी है।

जिसे रिखणीखाल प्रखंड के प्रधानों व ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों द्वारा शिकायती पत्र के रूप में लिया व देखा जा रहा है। सूचना एकत्र करने व जानकारी के लिए सूचना मांगी गयी है, ताकि आम नागरिक को भी पता चले कि हमारे प्रिय योग्य, जुझारू, कर्मठ, सुशील प्रधान कितना अच्छा कार्य कर रहे हैं और गाँव का विकास कितना हो रहा है।

यह भी संज्ञान में आया है कि, कुछ प्रधानों व ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों द्वारा क्षेत्र में गलतफहमी व भ्रम फैलाया जा रहा है कि, श्री रमोला ने आरटीआई श्री अनूप भंडारी जो कि रिखणीखाल प्रखंड में सहायक विकास अधिकारी पंचायत है, उनके कहने व बोलने से लगायी है।

जबकि रमोला कहते हैं कि, ये मेरा अधिकार है, मैने किसी के कहने पर नहीं लगायी। क्या मेरा सूचना मांगना गलत है या मेरे अधिकारों का हनन किया जा रहा है। फिर यदि सही काम किया है, तो घबराने व बौखलाहट किस बात का है।

भंडारी पर झूठे आरोप लगाना बेबुनियाद व सरासर गलत है। मैने स्वयं अपने विवेक व बुद्धिमता से लगाया है। किसी अन्य पर आरोप मढ़ना गलत है। ऐसा मालूम पड़ता है कि, दाल में कुछ काला है, वाली कहावत चरितार्थ होती है, तथा इस गफलत में न रहे कि आरटीआई वापस होगी।

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