एसबीएस विश्वविद्यालय में एनसीसी शिविर का शुभारंभ। विभिन्न प्रदेशों से आए 600 कैडेट

देहरादून। सरदार भगवान सिंह (एसबीएस) विश्वविद्यालय में ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत (ईबीएसबी-II)’ थीम पर आधारित दस दिवसीय राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) शिविर का उद्घाटन किया गया। इस शिविर का आयोजन 81 यूके बीएन एनसीसी, बागेश्वर द्वारा किया गया है।

यह शिविर विविधता में एकता की भावना को बढ़ावा देते हुए राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को सशक्त बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। इसमें पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़ और उत्तराखंड से आए 600 कैडेट शामिल हुए हैं।

गार्ड ऑफ ऑनर और उद्घाटन

समारोह की शुरुआत सावधानीपूर्वक निष्पादित गार्ड ऑफ ऑनर से हुई, जिसमें कैडेटों ने अनुशासन और सौहार्द का शानदार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में एसबीएस विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, 81 यूके बीएन एनसीसी के अधिकारी और प्रशिक्षक भी मौजूद रहे।

ब्रिगेडियर विकास ढींगरा का संबोधन

मुख्य अतिथि ब्रिगेडियर एवं ग्रुप कमांडर विकास ढींगरा ने उद्घाटन भाषण में भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को जोड़ने में एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा,

“यह पहल राज्यों की जीवंत परंपराओं को जोड़ती है और आपसी समझ को मजबूत बनाती है।”

उन्होंने कैडेटों को अनुशासन, अखंडता और निस्वार्थ सेवा जैसे एनसीसी के मूल मूल्यों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।

कुलपति प्रो. जे. कुमार का संदेश

एसबीएस विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) जे. कुमार ने शिविर की मेजबानी पर गर्व व्यक्त किया और कैडेटों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह पहल विश्वविद्यालय के चरित्र निर्माण और सामाजिक जिम्मेदारी के मिशन के अनुरूप है।

शिविर की गतिविधियाँ

कमांडिंग ऑफिसर कर्नल सत्येंद्र त्रिपाठी ने बताया कि शिविर में कैडेटों के लिए शारीरिक प्रशिक्षण, सटीक अभ्यास, टीम-निर्माण और नेतृत्व विकास जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं। उन्होंने इसे कैडेटों के लिए एक नई चुनौतियों को स्वीकार करने और जिम्मेदार नागरिक बनने का अवसर बताया।

समन्वय

इस शिविर का समन्वय लेफ्टिनेंट (डॉ.) दीपा मिश्रा थपलियाल और लेफ्टिनेंट (डॉ.) मोहित भट्ट द्वारा किया जा रहा है, जो एसबीएस विश्वविद्यालय के एनसीसी विंग की सक्रिय भूमिका को दर्शाता है।

यह दस दिवसीय शिविर कैडेटों को एक परिवर्तनकारी अनुभव प्रदान करेगा, जिससे वे विविधता और एकता से भरे जीवंत भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।

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