एक ही मंडप में हुईं छह शादियां, सादगी और सामाजिक एकता की बनी मिसाल

चकराता 30 अप्रैल 2026 रिपोर्ट -नीरज उत्तराखंडी उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र के खारसी गांव में एक अनोखा और प्रेरणादायक विवाह समारोह देखने को मिला, जहां एक ही परिवार में एक साथ छह शादियां संपन्न हुईं। इस सामूहिक आयोजन ने न केवल सामाजिक एकजुटता का संदेश दिया, बल्कि फिजूलखर्ची पर रोक लगाने की दिशा में भी […]

चकराता 30 अप्रैल 2026

रिपोर्ट -नीरज उत्तराखंडी

उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र के खारसी गांव में एक अनोखा और प्रेरणादायक विवाह समारोह देखने को मिला, जहां एक ही परिवार में एक साथ छह शादियां संपन्न हुईं।

इस सामूहिक आयोजन ने न केवल सामाजिक एकजुटता का संदेश दिया, बल्कि फिजूलखर्ची पर रोक लगाने की दिशा में भी एक मिसाल पेश की।

खारसी गांव में संयुक्त परिवार के मुखिया दौलत सिंह चौहान और उनके भाई मोहन सिंह चौहान के परिवार में 28 से 30 अप्रैल तक भव्य विवाह समारोह आयोजित किया गया।

इस दौरान परिवार के पांच बेटों की बारात एक साथ आई और पांच नई बहुएं एक ही दिन गृह प्रवेश कर परिवार का हिस्सा बनीं। इसी अवसर पर परिवार की बेटी की डोली भी विदा हुई।

सादगी बनी समारोह की पहचान

जौनसार-बावर क्षेत्र की परंपरा के अनुरूप विवाह समारोह पूरी सादगी से संपन्न हुआ। यहां दहेज प्रथा का कोई स्थान नहीं रहा। दुल्हनों ने केवल मंगलसूत्र धारण किया और महंगे आभूषणों व दिखावे से दूरी बनाए रखी गई। परिवार ने पहले ही तय कर लिया था कि शादी में अनावश्यक खर्च नहीं किया जाएगा।

एक मंडप, एक भोजन व्यवस्था और बड़ी बचत

सभी विवाह एक ही मंडप में संपन्न हुए और मेहमानों के लिए एक ही सामूहिक भोजन की व्यवस्था की गई। एक साथ रस्में पूरी होने से खर्च में भारी कमी आई।

परिवार के अनुसार, यदि छह शादियां अलग-अलग आयोजित होतीं तो कुल खर्च 60 लाख से 1 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता था। सामूहिक आयोजन से लगभग 70 प्रतिशत तक खर्च बचाया गया।

परिवार ने बताया कि बचाई गई राशि बच्चों की शिक्षा और खेती-किसानी में निवेश की जाएगी, जिससे भविष्य को मजबूत बनाया जा सके।

सामाजिक संदेश बना चर्चा का केंद्र

इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज को यह संदेश देना था कि रिश्तों की मजबूती दिखावे से नहीं, बल्कि आपसी प्रेम और सामूहिकता से बनती है। परिवार का मानना है कि विवाह संस्कार को प्रतिस्पर्धा और आडंबर से दूर रखते हुए सामाजिक सहयोग का माध्यम बनाना चाहिए।

उत्सव में झलकी लोक संस्कृति

इस ऐतिहासिक अवसर पर दूर-दराज से हजारों मेहमान खारसी गांव पहुंचे। समारोह में क्षेत्र के विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधियों के साथ स्थानीय लोक कलाकार भी शामिल हुए। पारंपरिक ढोल-दमाऊ की थाप और हारुल नृत्य ने पूरे वातावरण को उल्लासमय बना दिया। उपस्थित लोगों ने नवविवाहित जोड़ियों को आशीर्वाद देते हुए इस पहल की सराहना की।

खारसी गांव का यह आयोजन न केवल विवाह की एक अनूठी परंपरा के रूप में याद किया जाएगा, बल्कि सादगी, सामूहिकता और सामाजिक जिम्मेदारी की प्रेरक मिसाल भी बनेगा।

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