समाजसेवी रोशन रतूड़ी ने दुबई से भिजवाया उत्तराखंड के बेटे का शव। सरकार ने लौटाया। रोशन ने खूब सुनाई खरी-खोटी !!

टिहरी के सकलाना निवासी कमलेश भट्ट की दुबई में संदिग्ध परिस्थितियों में 16 अप्रैल को हुई मौत के बाद जब उनके परिजन भारत सरकार और उत्तराखंड सरकार से मिन्नतें कर कर के थक गए लेकिन सब वापस लाने में असमर्थ रहे तो समाजसेवी रोशन रतूड़ी आगे आए और उन्होंने ने मृतक कमलेश भट्ट का शव भारत के लिए भिजवाने का प्रबंध कर  दिया था।
दिवंगत कमलेश को भिजवाने मे लगे रोशन रतूडी
किंतु भारत सरकार के अधिकारियों ने शव लेने से मना कर दिया। कमलेश का शव हासिल करने के लिए दिल्ली पहुंचे उनके परिजन इस बात से बेहद निराश हो गए और बेचारे वापस लौट आए।
दिवंगत कमलेश के परिजन
 इसका पता चलने पर समाजसेवी रोशन रतूड़ी बेहद नाराज हो गए और उन्होंने फेसबुक लाइव के माध्यम से भारत सरकार और उत्तरांचल उत्तराखंड सरकार सहित यहां के तमाम बड़े नाम वाले व्यक्तियों को जमकर कोसा और सभी को इस बात के लिए लताड़ा कि कमलेश भट्ट एक आम व्यक्ति था यदि वह कोई नेता मंत्री का बेटा होता तो उसके लिए सरकारें कुछ भी कर सकती थी लेकिन वह एक होटल कर्मी भाई था, इसलिए किसी को उससे कोई मतलब नहीं।
 गौरतलब है कि समाजसेवी रोशन रतूड़ी ने 23 अप्रैल को आबू धाबी से यह शव कार्गो विमान के जरिए दिल्ली भिजवाना था लेकिन भारतीय दूतावास ने विदेश से आने वाले शव को लेने से मना कर दिया।
 आबू धाबी में नौकरी करने के लिए गए कमलेश भट्ट की वहां लॉक डाउन के दौरान एक कमरे में मौत हो गई थी किंतु मौत के कारणों का पता नहीं चल पाया।
रोशन रतूड़ी ने पर्वतजन से कहा कि उन्हें कस्टम का फोन आया था कि अब कमलेश भट्ट का पार्थिव शरीर वापस ले जाए। तथा अब वह कमलेश के परिजनों से बातचीत करेंगे तथा यदि वह कहेंगे तो रीति रिवाज से शव का अंतिम संस्कार यहीं कर दिया जाएगा।
कल शाम रोशन रतूड़ी ने पर्वतजन को बताया था कि दिवंगत कमलेश भट्ट का पार्थिव शरीर भारत भिजवाने मे सफल रहने पर उन्होंने यूएई सरकार सहित इमीग्रेशन और एयरपोर्ट अथॉरिटी का भी धन्यवाद किया था, किंतु आज जब यह सब पता लगा तो वह खासे नाराज हो गए और उन्होंने भारत तथा उत्तराखंड के नेताओं को जमकर लताड़ लगाई। उनके फेसबुक लाइव को एक घंटे में 7000 लोगों ने शेयर किया है और उस पर 6000 से भी अधिक कमेंट आ चुके हैं तथा 10000 से अधिक लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
 रोशन रतूड़ी ने कहा कि दिवंगत कमलेश भट्ट के शव को लसेने से मना करने से भारत सरकार की कार्यप्रणाली पर बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया है।

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