कहीं जंगलों में लगी आग तो कहीं अवैध रूप से चीड़ के हरे पेड़ों का कटान। सवालों के घेरे में वन विभाग

कहीं जंगलों में लगी आग तो कहीं अवैध रूप से चीड़ के हरे पेड़ों का कटान। सवालों के घेरे में वन विभाग रिपोर्ट- गिरीश चंदोला थराली विकास खंड के जंगलों में 2 दिनों से अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। वही वन विभाग के आग बुझाने में हाथ-पांव फूल गए। आग लगने की सूचना […]

कहीं जंगलों में लगी आग तो कहीं अवैध रूप से चीड़ के हरे पेड़ों का कटान। सवालों के घेरे में वन विभाग

रिपोर्ट- गिरीश चंदोला
थराली विकास खंड के जंगलों में 2 दिनों से अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। वही वन विभाग के आग बुझाने में हाथ-पांव फूल गए। आग लगने की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम आग बुझाने के लिए जंगलों में पहुंची। लेकिन सूखा होने के चलते जंगलों में आग तेजी से फैल चुकी थी, जिस पर वन विभाग ने ग्रामीणों की मदद से आग बुझाने का कार्य शुरू कर दिया है। बेमौसमी दवानल का मुख्य कारण जंगलों में अवैध रूप से इमारती लकड़ियों के लिए हरे पेड़ों की अवैध कटान होने की सूचना भी ग्रामीणों ने बद्रीनाथ वन प्रभाग गोपेश्वर के प्रभागीय वन अधिकारी आशुतोष सिंह को सूचना मिलने के बाद बद्रीनाथ वन प्रभाग गोपेश्वर के प्रभागीय वन अधिकारी थराली विकासखंड के तलवाड़ी स्टेट के जंगलों में पहुंचे एवं जंगलों का निरीक्षण कर रहे हैं।

वहीं ग्रामीण पूर्व क्षेत्र पंचायत सुभाष पिमोली, भरत बिष्ट, खिलाफ सिंह रावत, आनंदी देवी, गंगा देवी आदि लोगों ने बताया कि, जंगल में साराखोली एवं सरतोली धार नामक स्थान पर कई हरे चीड़ के पेड़ काटे गए हैं। संभवत इन पेड़ों की चोरी को छुपाने के लिए जंगल में जानबूझकर आग लगाई गई है। जंगलों में चीड़ के हरे पेड कब काटे इसकी सही जानकारी अब तक विभाग नहीं जुटा पाया। वहीं वन विभाग की नाक के नीचे जंगलों में अवैध कटान जारी है। लेकिन विभाग कुंभकरणी नींद सोया है। अब सवाल यह है कि, जब विभाग ही कुंभकरणी की नींद सोता रहेगा तो जंगल ऐसे ही धू धू कर जलते रहेंगे।

वही इस पूरे मामले पर बद्रीनाथ वन प्रभाग गोपेश्वर के प्रभागीय वन अधिकारी आशुतोष सिंह ने कहा कि, जंगलों में अवैध कटान किसने की है उसका पता लगाया जा रहा है। संबंधित वन क्षेत्र अधिकारी को बताया गया है। जल्द ही उन लोगों का पता लगाया जाएगा जिनके द्वारा जंगलों में अवैध रूप से हरे पेड़ों की कटान की गई थी।

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