बड़ी खबर : पीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा करने में पिछड़ा उत्तराखंड। पढ़िए पूरी खबर

State Ranking Index for NFSA : नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट (NFSA) प्रधानमंत्री मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है जिसे लागू करने के लिए पीएम कड़ी मेहनत कर रहे हैं लेकिन सरकार को न प्रधानमंत्री मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट की फिक्र और ना ही राज्य में जरूरतमंद लोगों तक सही तरीके से खाद्य सामग्री पहुंचाने की चिंता नजर आ रही है ।

केंद्रीय खाद्य आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल ने राज्यों की रैंकिंग रिलीज की है। जिसमें उत्तराखंड पिछड़ा साबित हुआ।  

इस इंडेक्स में ओडिशा राज्य ने पहला स्थान हासिल किया। जबकि गोवा सबसे फिसड्डी साबित हुआ है।

हिमालयी राज्यों में त्रिपुरा ने बाजी मारी और दूसरे स्थान पर हिमाचल प्रदेश और सिक्किम तीसरे स्थान पर रहा। लेकिन उत्तराखंड पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट को सही से लागू करने के मामले में हिमाचल से पिछड़ कर पांचवें पायदान पर रहा । 

ऑल इंडिया कॉम्प्रिहेंसिव लेवल रैंकिंग में भी पड़ोसी यूपी जहां दूसरे, हिमाचल 11वें, झारखंड 12वें और छत्तीसगढ़ 22वें स्थान पर रहा जबकि उत्तराखंड 24वें पायदान पर रहा।

नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट में तो उत्तराखंड पिछड़ा ही साथ ही राज्य का नाम उन राज्यों में भी शुमार हो गया जहां के खाद्य आपूर्ति मंत्री इस आयोजन से गैर हाजिर रहे।

जिसके चलते केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बाकायदा उन राज्यों को लेकर शिकायत भी दर्ज कराई जहां से खाद्य मंत्री इस मीटिंग में भौतिक या वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ने तक की जहमत नहीं उठा पाए। पीयूष गोयल ने ऐसे अनुपस्थित रहे राज्यों को खूब खरी खोटी सुनाई। बैठक में मौजूद ऐसे राज्यों के अधिकारियों को साफ तौर पर कहा गया कि आप जाकर अपनी सरकार को बताएं कि उनके मंत्री गैर हाजिर रहे और केंद्र ने इसे दर्ज कर लिया है।

उत्तराखंड के साथ ही झारखंड, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा, असम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड के खाद्य आपूर्ति मंत्री अनुपस्थित रहे।

केंद्रीय मंत्री गोयल ने कहा कि यदि खाद्य और पोषण सुरक्षा को लेकर राज्यों का ये र रवैया है तो यह बहुत खरब तरीके से चीजों को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बार-बार यह संदेश देने के बावजूद भी कि केंद्र की योजनाओं का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाया जाए खाद्य आपूर्ति और उपभोक्ता मंत्री रेखा आर्य का गैर हाजिर होना अपने आप में बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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