चुनौती: वनाग्नि को बांज के जंगलों तक पहुंचने से रोकना सबसे बड़ी चुनौती

स्टोरी(कमल जगाती, नैनीताल):-

उत्तराखंड वन महकमे के लिए सबसे बड़ी चुनौती चीड़ के जंगलों में लगी आग को बांज के जंगलों तक पहुंचने से रोकना है । अपर प्रमुख मुख्य वन संरक्षक(ए.पी.सी.सी.एफ.) कपिल जोशी ने बताया कि, मुख्य वन संरक्षक, वन संरक्षक और डी.एफ.ओ.को आदमी बढ़ाकर आग पर काबू पाने के लिए कह दिया गया है ।

        उत्तराखंड के हरे भरे जंगलों में से लगभग 1200 हैकटेयर हिस्सा आग की चपेट में है । कुमाऊं क्षेत्र के लगभग 350 हैकटेयर जंगल आग की मार झेल रहे हैं । वन विभाग और दमकल विभाग की लाख कोशिशों के बावजूद जब वनाग्नि पर काबू नहीं पाया जा सका तो केंद्रीय ग्रह मंत्री ने आग से निबटने के लिए भारतीय वायु सेना के एम.आई.हेलीकॉप्टर भेज दिए है। 

प्रदेश के कुल 25,86,318 हैक्टेयर वन क्षेत्र में से चीड़ के वृक्षों ने 15.25 प्रतिशत वन क्षेत्र में कब्जा कर रखा है । इसके सामने बांज के जंगल सिमटकर केवल 14.81 प्रतिशत रह गए हैं । विषेशज्ञों के अनुसार बांज का जंगल घटना और चीड़ का बढ़ना चिंताजनक है ।

 जल संरक्षण में मददगार बांज के जंगलों तक आग को पहुंचने से रोकना एक बड़ी चुनौती मानते हुए कार्यवाही शुरू कर दी गई है । बांज की प्रजाति उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में समुद्र सतह से 6,000 फ़ीट से 10,000 फ़ीट की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाई जाती है । चीड़ के वृक्ष लगभग 1,000 फ़ीट की ऊंचाई से 4,500 फ़ीट की ऊंचाई के मध्य पाए जाते हैं । ऐसे में वन महकमे के उच्चाधिकारी ऊपरी वन क्षेत्रों की तरफ बढ़ती वनाग्नि को रोकना एक बड़ी चुनौती मानते हैं । वो वनाग्नि पर काबू पाने के लिए ग्रामीणों की मदद भी मांग रहे हैं ।

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