एक्सक्लूसिव : शिक्षा निदेशक की फर्जी डिग्री प्रकरण में कुमाऊं विश्वविद्यालय ने दी एफआईआर। पंद्रह दिन से दाबे बैठी पुलिस 

उत्तराखंड शिक्षा विभाग के शिक्षा निदेशक(माध्यमिक) मुकुल कुमार सती की फर्जी डिग्री के प्रकरण में कुमाऊं विश्वविद्यालय ने पुलिस में एफ आई आर दर्ज कराने के लिए तहरीर दी हुई है लेकिन पंद्रह दिन से अधिक समय गुजर जाने के बावजूद पुलिस ने इस पर मुकदमा दर्ज नहीं किया है। कुमाऊं विश्वविद्यालय ने 24 अगस्त को दी थी और 1 नवंबर को पुलिस अधीक्षक को तहरीर दी हुई है। हाई प्रोफाइल होने के कारण पुलिस ने अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं किया है।
सूचना आयुक्त ने दिए थे एफआइआर के निर्देश 
 गौरतलब है कि काफी लंबे समय से अपर निदेशक मुकुल कुमार सती की डिग्रियों की वैधता पर सवाल उठते रहे हैं।
यह मामला जब उत्तराखंड राज्य सूचना आयोग में लाया गया तो राज्य सूचना आयुक्त सीएस नपलच्याल ने सती के गायब दस्तावेजों को गंभीर मानते हुए कुमाऊं विश्वविद्यालय को निर्देशित किया था कि 3 सदस्य कमेटी बिठाकर इसकी जांच की जाए और आदेश दिया था कि यदि दस्तावेज नहीं मिलते तो उसकी एफ आई आर दर्ज की जाए।
कोतवाली मे तहरीर
तीन सदस्यीय कमेटी की जांच रिपोर्ट पर तहरीर
 कुमाऊं विश्वविद्यालय ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन करके इस सारे प्रकरण पर गंभीरता से चिंतन मनन किया कि 1989-90 में B.Ed के छात्र मुकुल सती ने हल्द्वानी में कार्यरत रहते हुए कैसे प्रवेश ले लिया और व कैसे उनकी 75% हाजिरी लग गई !
स्वर्गवासी विभागाध्यक्ष के सर ठीकरा
समिति ने B.Ed विभाग भवन के स्थानांतरण से लेकर उपस्थिति पंजिका संभालने वाले कर्मचारी और तत्कालीन स्वर्गवासी विभागाध्यक्ष से लेकर अन्य कई मुद्दों पर जांच की और सभी ने ठीकरा स्वर्गवासी विभागाध्यक्ष के सर पर फोड़ दिया।
कमेटी की रिपोर्ट
हालांकि सूचना आयुक्त के आदेश के अनुसार गायब दस्तावेजों को लेकर अल्मोड़ा के थाना कोतवाली में एफ आई आर दर्ज करने के लिए 24 अगस्त 2020 को तहरीर दे दी है किंतु आज तक भी इस प्रकरण में एफ आई आर दर्ज नहीं की गई।
पुलिस अधीक्षक को तहरीर 
 उसके बाद वर्तमान विभागाध्यक्ष प्रोफेसर विजयारानी ढौंडियाल ने पहले पुलिस अधीक्षक अल्मोड़ा से 31 अगस्त को मौखिक वार्ता की और फिर 1 सितंबर को तहरीर दी गई।
पुरानी तहरीर को संलग्न करते हुए दोबारा से एफ आई आर दर्ज करने के लिए समस्त दस्तावेजों के साथ निवेदन किया किंतु अभी तक भी मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है।
ये है मामला
 मुकुल कुमार सती ने एक ही टाइम पीरियड में 1989-90 के दौरान अल्मोड़ा से B.Ed की डिग्री भी हासिल की तथा शत प्रतिशत हाजिरी के साथ हल्द्वानी के हरिदत्त इंटर कॉलेज में रसायन विभाग में प्रवक्ता  पद पर नौकरी भी की इसी मामले में यह सवाल उठता है कि जब B.Ed की डिग्री के लिए 75% हाजिरी जरूरी होती है तो फिर एक ही समय में मुकुल कुमार सती शत-प्रतिशत हाजिरी के साथ भला 100 किलोमीटर दूर हल्द्वानी में कैसे पढ़ा सकते हैं !
पुलिस ने की जांच मे पुष्टि,  अब नही संतुष्टि 
 नैनीताल पुलिस के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक 31 जनवरी 2019 को भी इसकी जांच रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को प्रेषित कर चुके हैं और उन्होंने भी अपनी जांच रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि की है।
पुलिस अधीक्षक नैनीताल की जांच रिपोर्ट
 हालांकि पुलिस ने बेहद लापरवाही से जांच की है। पुलिस अपनी जांच में न तो मुकुल सती के अल्मोड़ा कॉलेज की उपस्थिति पंजिका प्राप्त कर सकी और ना ही हल्द्वानी कॉलेज में अध्यापक के रूप में उनके तैनाती का नियुक्ति आदेश ही प्राप्त कर सकी।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल ने अपनी जांच रिपोर्ट में यह निष्कर्ष भी निकाला था कि यह मामला शिक्षा विभाग से संबंधित है इसलिए जांच एवं कार्यवाही शिक्षा विभाग उत्तराखंड से किया जाना उचित प्रतीत होता है।
 अब जब शिक्षा विभाग ने खुद ही अपनी जांच करके गायब दस्तावेजों को लेकर थाने और एसएसपी में तहरीर दे दी है तो अब पुलिस मुकदमा दर्ज करने को भी तैयार नहीं है !
 क्या यही है प्रचंड बहुमत का भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टोलरेंस !!

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