धोखा: फीस एक्ट तो बना नहीं,अब प्राधिकरण का जुमला

निजी स्कूलों में फीस और एडमिशन प्रक्रिया को नियंत्रित करने की प्रक्रिया पिछले 9 सालों से ठप पड़ी हुई है और अब नई शिक्षा नीति नए-नए मानक प्राधिकरण के जुमले लाए जा रही है। दरअसल राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार स्कूलों की निगरानी के लिए राज्य स्तरीय प्राधिकरण बनने पर विचार किया जा रहा है […]

निजी स्कूलों में फीस और एडमिशन प्रक्रिया को नियंत्रित करने की प्रक्रिया पिछले 9 सालों से ठप पड़ी हुई है और अब नई शिक्षा नीति नए-नए मानक प्राधिकरण के जुमले लाए जा रही है।

दरअसल राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार स्कूलों की निगरानी के लिए राज्य स्तरीय प्राधिकरण बनने पर विचार किया जा रहा है ।

राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण  के तहत बनने वाला यह संस्थान सरकारी निजी तथा  अर्द्धसरकारी सभी स्कूलों को नियंत्रित करेगा ।

इस प्राधिकरण में शिक्षा अधिकार कानून के तहत काम किया जाएगा । यह केवल फीस तय नही करेगा,बल्कि स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों का न्यूनतम वेतन भी तय कर सकेगा।

शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के निर्देश पर शिक्षा अधिकारियों  ने मानक प्राधिकरण का ढांचा तैयार कर लिया है और इस परिपेक्ष में आगामी 11 नवंबर को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक में इस एक्ट को लाया जा सकता है । 

लेकिन पिछले 9 वर्षों से फीस एक्ट बनाने की कसरत चल रही है जो आज भी वही की वही अटकी पड़ी हुई है। 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा ने भी शुरुआती दौर में फीस एक्ट में काफी दिलचस्पी दिखाई, लेकिन बाद में उन्होंने भी इस एक्ट से अपना पल्ला झाड़ दिया।

जब 9 सालों से चल रही इस प्रक्रिया में आज तक फीस एक्ट नहीं बन पाया तो अब वही शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे नया मानक प्राधिकरण ला रहे हैं।

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