बड़ा सवाल : आखिर क्लीन चिट के बावजूद सस्पेंड क्यों हैं UKSSSC के पूर्व सचिव बडोनी !

विजेंद्र राणा

बिना चार्जशीट के 9 माह से अधिक निलंबन झेल रहे संतोष बडोनी को यह किस बात की सजा मिल रही है क्योंकि आयोग 9 माह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी यह तय नहीं कर पाया कि संतोष बडोनी को निलंबन किस आधार पर किया गया है। 

निलंबन के नियमानुसार निलंबन के 3 माह के भीतर आरोपपत्र ना देने पर निलंबन स्वत: निरस्त हो जाता है। इसके बावजूद बडोनी निलंबन झेल रहे हैं सवाल यह भी है कि पर्दे के पीछे से यह खेल कौन खेल रहा है।

जानिए क्या है मामला।

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग लंबे समय से भर्ती घोटालों को लेकर चर्चा में रहा है । आपको बता दें इस मामले में बड़ी खबर यह है कि आयोग के पूर्व सचिव जिन्हें भर्ती घोटाले आरोपों में निलंबित किया गया था अब उन्हें  क्लीन चिट मिल चुकी है।

पुलिस एसटीएफ और आयोग ने सभी भर्ती घोटालों की गहन जांच के बाद जब अपना जवाब भेजा  तो इसके बावजूद सचिवालय प्रशासन ने इस संदर्भ में दोबारा जवाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया । प्रत्युत्तर/ जबाव पूर्ववत ही मिला। संतोष बडोनी को 3 अगस्त को शासन से अटैच कर दिया गया था इसके बाद 2 दिसंबर को लापरवाही के आरोपों में उन्हें निलंबित कर दिया गया। 

अब यहां बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि क्या सरकार जनता के दबाव में आकर पूर्व सचिव बडोनी का निलंबन नहीं हटा रही है!

क्या भर्ती घोटालों में इतना ज्यादा मीडिया ट्रायल और जनता का आक्रोश निकल कर सामने आया कि सरकार अब पूर्व सचिव बडोनी को बिना किसी बात के सजा दे रही है !

 

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