एक्सक्लूसिव : केंद्र सरकार ने आईएफएस विनय भार्गव के खिलाफ कार्रवाई के लिए उत्तराखंड सरकार को दिया निर्देश

केंद्र सरकार का मुनस्यारी इको हट निर्माण में वन कानून उल्लंघन पर सख्त रुख, उत्तराखंड सरकार को कार्रवाई के निर्देश केंद्र सरकार ने उत्तराखंड के मुनस्यारी में इको हट निर्माण के दौरान भारतीय वन अधिनियम, 1927 और वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 के उल्लंघन के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। पर्यावरण, वन एवं […]

  • केंद्र सरकार का मुनस्यारी इको हट निर्माण में वन कानून उल्लंघन पर सख्त रुख, उत्तराखंड सरकार को कार्रवाई के निर्देश

केंद्र सरकार ने उत्तराखंड के मुनस्यारी में इको हट निर्माण के दौरान भारतीय वन अधिनियम, 1927 और वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 के उल्लंघन के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के देहरादून स्थित क्षेत्रीय कार्यालय ने 13 अगस्त को जारी एक पत्र में उत्तराखंड सरकार को उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई और अभियोजन शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
यह कार्रवाई मुख्य वन संरक्षक (वर्किंग प्लान) संजीव चतुर्वेदी, आईएफएस की रिपोर्ट के आधार पर की गई है।

केंद्र के निर्देश:
अभियोजन और कार्रवाई केंद्र सरकार ने उत्तराखंड के प्रधान सचिव (वन) को निर्देश दिया है कि उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ के रूप में भेजा जाए। पत्र में वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों, प्राधिकरणों और संगठनों की पहचान कर उनके खिलाफ धारा 3A और 3B के तहत कार्रवाई करने को कहा गया है।

इसके अलावा, वन (संरक्षण एवं संवर्धन) नियम, 2023 के उप-नियम 15(1) के तहत शिकायत दर्ज करने के लिए प्रभागीय वन अधिकारी या उच्च पदाधिकारी को नामित करने का प्रस्ताव भी मांगा गया है।

संजीव चतुर्वेदी की रिपोर्ट में खुलासा
संजीव चतुर्वेदी ने अपनी रिपोर्ट में सितंबर 2024 से नवंबर 2024 के बीच पिथौरागढ़ के तत्कालीन प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) डॉ. विनय भार्गव को उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

उनकी 500 पृष्ठों से अधिक की जांच रिपोर्ट में 2019 में इको हट निर्माण में 1.63 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा किया गया। इसमें बिना टेंडर के निर्माण कार्य, निजी फर्म को बिना अनुमोदन के सामग्री आपूर्ति का चयन, और पर्यटन आय का 70% हिस्सा बिना उच्चस्तरीय अनुमोदन के निजी संस्था को हस्तांतरित करने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

इसके अलावा, वित्तीय वर्ष 2020-21 में पिथौरागढ़ वन प्रभाग में फायर लाइन निर्माण में भी अनियमितताएं सामने आई हैं।
राज्य सरकार की कार्रवाई उत्तराखंड सरकार ने 18 जुलाई को डॉ. विनय भार्गव को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसमें इन अनियमितताओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया।

चतुर्वेदी ने अपनी रिपोर्ट में भार्गव के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए सीबीआई और ईडी को मामला सौंपने की सिफारिश की है, क्योंकि आरोपित अपराध अनुसूचित अपराधों की श्रेणी में आते हैं।

पहले भी विवादों में रहे भार्गव

यह पहला मौका नहीं है जब डॉ. विनय भार्गव विवादों में हैं। 2015 में भी वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों में राज्य सरकार ने उन्हें “अनुभवहीनता” के आधार पर आरोपमुक्त कर दिया था।

केंद्र का सख्त संदेश
केंद्र सरकार का यह कदम वन संरक्षण और वित्तीय जवाबदेही के प्रति उसकी गंभीरता को दर्शाता है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि संजीव चतुर्वेदी की 8 अगस्त की ईमेल रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की जा रही है। पर्यावरण और वन संरक्षण के प्रति केंद्र सरकार की यह सख्ती उत्तराखंड में वन कानूनों के पालन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

आगे की राह
उत्तराखंड सरकार को अब केंद्र के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई करनी होगी और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ अभियोजन शुरू करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। इस मामले पर पर्यावरणविदों और स्थानीय समुदायों की भी नजर बनी हुई है, जो मुनस्यारी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में वन संरक्षण को लेकर चिंतित हैं।

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