गैरसैंण पर निर्णायक संघर्ष की तैयारी – मानसून सत्र से पहले आंदोलनकारीयों का अल्टीमेटम।70 विधायकों का होगा पुतला दहन 

डेस्क न्यूज पर्वतजन

उत्तराखंड में स्थायी राजधानी को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। 19 अगस्त से गैरसैंण में शुरू होने जा रहे विधानसभा के मानसून सत्र से पहले किसान मंच ने ऐसा ऐलान किया है, जिसने पूरे राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।

25 साल बाद भी अधूरी मांग

राज्य निर्माण के समय से ही गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग उठती रही है। आंदोलनकारियों का कहना है कि पच्चीस वर्ष गुजर जाने के बाद भी यह मुद्दा अधूरा है और अब “इंतजार की घड़ी खत्म” हो चुकी है। किसान मंच का आरोप है कि हर सरकार ने इस जनभावना को नजरअंदाज किया और पहाड़ के सवाल पर राजनीति ही की।

गैरसैंण से अनिश्चितकालीन धरना शुरू

किसान मंच ने घोषणा की है कि अमर शहीद वीर चंद गढ़वाली की प्रतिमा के सामने गैरसैंण रामलीला मैदान में शांतिपूर्ण लेकिन अनिश्चितकालीन धरना 19 अगस्त से शुरू होगा। यह धरना तब तक चलेगा, जब तक मानसून सत्र में गैरसैंण राजधानी पर ठोस निर्णय नहीं हो जाता।

किसान मंच का अल्टीमेटम

यदि तीन दिनों के भीतर विधानसभा में राजधानी मुद्दे पर चर्चा और निर्णय नहीं होता, तो सभी 70 विधायकों के प्रतीकात्मक पुतलों का सामूहिक दहन गैरसैंण में किया जाएगा।

आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन चेतावनी दी गई है कि तीसरे दिन से ही विरोध पूरे प्रदेश में फैल जाएगा।

मंच ने स्पष्ट कर दिया है कि जो भी विधायक गैरसैंण राजधानी की मांग का समर्थन करेगा, उसका पुतला दहन नहीं किया जाएगा।

आंदोलनकारियों की रणनीति

किसान मंच के कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब यह लड़ाई अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। उनका नारा है –
“राजधानी गैरसैंण चाहिए – अब चाहिए”।
इस आंदोलन को केवल प्रतीकात्मक विरोध नहीं माना जाएगा, बल्कि इसे जनता का सीधा संदेश समझा जाए कि पहाड़ के साथ अब और समझौता नहीं होगा।

सरकार और प्रशासन पर दबाव

गैरसैंण में 70 विधायकों के पुतला दहन की तैयारी को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी चिंता बढ़ गई है। विधानसभा सत्र के अंदर और बाहर, दोनों जगह राजधानी का मुद्दा बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर सकता है।

किसान मंच का दो टूक संदेश

“या तो गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करो, अन्यथा इस बार पूरा उत्तराखंड जनप्रतिनिधियों को जनता की अदालत में कठघरे में खड़ा करेगा।”

साथ आएं अन्य आंदोलनकारी

इस आवाहन के बाद पूर्व में प्रेमचंद अग्रवाल को बर्खास्त करने की मांग को लेकर साथ बैठे आंदोलनकारी भी समर्थन में आए हैं और चौखुटिया निवासी पूर्व सैनिक एवं जन आंदोलनकारी भुवन सिंह कठायत एवं पहाड़पन फाउंडेशन की संस्थापक कुसुम लता बौड़ाई ने भी गैरसैंण रामलीला मैदान बैठने का निर्णय लिया है,यदि राजधानी की मांग को सुना जाता है तो ठीक अन्यथा सामूहिक पुतला दहन इतिहास रचेगा आंदोलनकारी का दो टूक कहना है,साथ ही भुवन ने यह भी कहा है कि 70 विधायकों में से जो भी विधायक पहाड़ हितैषी है राजधानी गैरसैंण का समर्थन करता है वह अपने पुतले की स्वयं हम आंदोलनकारियों से सुरक्षा करें.

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