बड़ी खबर: कैबिनेट के फैसलों पर भारी ब्यूरोक्रेट्स। नर्सिंग भर्ती का इंतजार।

नर्सिंग भर्ती के लिये 12 दिसंबर 2020 को 2621 पदों पर विज्ञापन हुआ था, जिसमें अनिवार्य रूप से 2 वर्ष का अनुभव और 30 बेड पर कार्य अनुभव मांगा गया था,किंतु कुछ समय बाद इसमें परिवर्तन कर अनुभव और 30 बेड की अनिवार्यता हटा दी गई।उस दिन से यह भर्ती विवादों में आ गई।

भर्ती एजेंसी चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड से  हटाकर प्राविधिक शिक्षा परिषद को दे दी गई, जिस कारण भर्ती प्रक्रिया पर अनगिनत सवाल खड़े हो गए।भर्ती प्रक्रिया तीन बार निरस्त हो चुकी है।

पिछली धामी सरकार द्वारा भर्ती को वर्षवार मेरिट के आधार पर करने का निर्णय 24 दिसंबर 2021 को ले लिया गया था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री  धन सिंह रावत के निर्णय की सराहना पूरे प्रदेश के सभी संगठनों ने भी की ।

सभी की यही मांग थी कि नर्सेज की भर्ती फार्मासिस्ट और  एनम की भांति होनी चाहिए। धामी सरकार ने यह भर्ती  फार्मासिस्ट और एनम की भाँति  करने का निर्णय 24 दिसंबर को 2021 को ले लिया था किंतु प्रदेश का  बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि अभी तक इसमें कोई जियो नहीं हो पाया है।

जबकि उसी दिन एनम की सेवा नियमावली में भी संशोधन  किया गया था और उनकी भर्ती प्रक्रिया गतिमान हो चुकी है। किंतु नर्सेज का अभी कोई जिओ नहीं हो पाया है जबकि 2011 केे बाद से  सामान्य नर्सेज की भर्ती आज तक नहीं हो पाई है ।

 

पूरे 12 वर्ष हो चुके हैं किंतु सरकार और ब्यूरोक्रेट सोए हैं  पूरे कोविड काल में भी  नर्सेज की कमी बनी रही, जिसको सरकार ने आउट सोर्स के माध्यम से पूरा किया।  किंतु 31मार्च को आउट सोर्स कर्मी की सेवाएं भी समाप्त हो गई है ।

इस प्रकार पूरी स्वास्थ्य व्यवस्थाएं चरमरा गई है। अकेले दून मेडिकल कॉलेज में 711 नर्सिंग अधिकारी के पद स्वीकृत हैं। जहां केवल 67 नर्सेज कार्य कर रही है।

 इसी प्रकार श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में 306 नर्सिंग अधिकारी के पद  स्वीकृत हैं किंतु केवल 22 नियमित नर्सेज कार्य कर रही है।

इतनी भारी कमी होने के बावजूद आज तक भर्ती प्रक्रिया  पूर्ण नहीं हो पाई है।  पिछले 2 वर्षों में कोविड-19  के कारण चार धाम यात्रा भी नहीं हो पाई है। अबकी बार  यात्रा सारे रिकॉर्ड तोड़ सकती है।

इन सब के मद्देनजर डॉक्टर और नर्सेज की ड्यूटी पूरे चार धाम यात्रा  रूट पर लगाई जाती है किंतु इतनी भारी कमी होने के कारण  यात्रियों और मरीजों के हित में कोई फैसला सरकार नहीं ले पा रही है।

जो वर्तमान में विपक्ष के लिए बड़ा मुद्दा बन सकता है   और विपक्ष  इसको एक भारी मुद्दा बना सकती है कि हमारे प्रदेश में स्वास्थ्य की व्यवस्थाएं बहुत ही  खस्ताहाल है। कुल मिलाकर विपक्ष के लिए सियासत की राह आसान हो जाएगी।

 

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