अफसरशाही : सीएम के निर्देशों को अफसरों ने दबाया। निराशा मे योग और संस्कृत शिक्षक

उत्तराखंड में नौकरशाही किस तरीके से हावी है इस बात का पता इससे लगता है कि सीएम धामी के निर्देश देने के बाद भी उक्त विषय पर अधिकारियों ने कोई कार्यवाही नहीं की है।

उत्तराखंड में सरकार पर अफसरशाही इतनी हावी है कि खुद सीएम के दिए निर्देशों को भी सरकारी अधिकारी मानने के लिए तैयार नहीं है और उस पर कोई भी कार्यवाही नहीं कर रहे हैं।

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने ट्वीट कर जानकारी दी थी कि अधिकारियों को विद्यालयों में संस्कृत एवं योग के शिक्षकों की संविदा पर नियुक्ति संबंधी कार्यवाही के निर्देश दिए हैं, इससे प्रदेश को सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक राजधानी बनाने में मदद मिलेगी।

साथ ही सीएम धामी ने यह भी लिखा की अधिकारियों को शिक्षकों के पारंपरिक एवं मंडलीय स्थानांतरण सहित अन्य प्रकरणों के संबंध में शीघ्र निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। संघ की शासकीय विद्यालयों में नियुक्ति प्रक्रिया आरंभ करने की मांग पर भी आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।

यह ट्वीट सीएम धामी ने 23 सितंबर को किया तब से लेकर अब तक 1 महीने से ऊपर का समय हो चुका है लेकिन अभी तक भी इसको लेकर अधिकारियों ने कोई भी कार्यवाही नहीं की है ।

इस संबंध में जब शिक्षा निदेशक रामकृष्ण उनियाल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि आरटीई के अंतर्गत नियम कानूनों के तहत शिक्षा विभाग संस्कृत शिक्षकों और योग शिक्षकों की नियुक्ति नहीं कर सकता।

शिक्षा निदेशक उनियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री तथा शासन को वस्तु स्थिति से अवगत कराया जाएगा।

 अहम सवाल यह है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जब निर्देश जारी कर दिए हैं तो फिर उनका अनुपालन अब किस तरह से होगा।

क्या उनके यह निर्देश भी चुनावी जुमला साबित होंगे।सरकारी अधिकारी जब मुख्यमंत्री तक की बात मानने के लिए तैयार नहीं है तो किसी आमजन की वह क्या सुनेंगे।

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