सुपर एक्सक्लूसिव : धामी की सीट पर धामी की नजर

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए कांग्रेस के धारचूला विधायक हरीश धामी अपनी सीट छोड़ सकते हैं।

धारचूला विधायक हरीश धामी ने पिछले दिनों अपने बयानों से इस तरह के कयासों को खुद ही हवा दे दी है।

हरीश धामी ने नेता प्रतिपक्ष के पद पर प्रबल दावेदारी करते हुए ऐलान कर दिया कि यदि हाईकमान ने उनकी दावेदारी पर  विचार नहीं किया तो फिर उन्हें अपने भविष्य के बारे में खुद ही विचार करना पड़ेगा।

गौरतलब है कि हरीश धामी पिछली सरकार में भी नेता प्रतिपक्ष के लिए दावेदार थे लेकिन हरीश रावत ने इंदिरा हृदयेश  गुट के साथ तालमेल बिठाने की रणनीति के तहत कद्दावर नेता इंदिरा हृदयेश को नेता प्रतिपक्ष बना दिया था ।

उनकी मृत्यु के बाद प्रीतम सिंह नेता प्रतिपक्ष बन गए थे ।

वर्ष 2012 में हरीश रावत के मुख्यमंत्री बनने पर हरीश धामी ने हरीश रावत के लिए अपनी सीट छोड़ दी थी, जिसके एवज में उन्हें वन निगम का अध्यक्ष बनाया गया था। वर्तमान हालात में कांग्रेस पूरी तरह गुटबाजी की शिकार है। और हरीश रावत की हार के बाद हरीश रावत गुट काफी कमजोर हो चला है। इस लिहाज से अंदाजा लगाया जा सकता है कि नेता प्रतिपक्ष के पद पर हरीश रावत गुट के हरीश धामी की संभवत नियुक्ति ना हो पाए।

ऐसे में अगर हरीश धामी अपने बारे में विचार करने वाले बयान के अनुसार कोई कदम उठाते हैं तो पुष्कर सिंह धामी के लिए अपनी सीट छोड़ना सब पर मुफीद सौदा साबित होगा ।

हालांकि खटीमा सीट से चुनाव हारने के बाद यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि हरीश धामी पुष्कर सिंह धामी के लिए सीट छोडते हैं तो भविष्य में पुष्कर  धामी फिर से आगामी विधानसभा चुनाव भी वहीं से लड़ सकते हैं। ऐसे में यह सीट हरीश धामी के हाथों से निकल भी सकती है और उनकी भविष्य की दावेदारी इस सीट पर कमजोर भी पड़  सकती है।

लेकिन सियासत के लिहाज से अभी उस दिशा में कोई भी अनुमान लगाना जल्दबाजी  है।

फिलहाल यदि हरीश धामी पुष्कर सिंह धामी के लिए अपनी सीट छोड़ते हैं तो उन्हें फिर से वन निगम जैसा महकमा फ्री हैंड के साथ मिल सकता है।

उसमें भी एक पेंच है कि वन निगम को राजनीतिक संरक्षण से मुक्त करने के लिए नौकरशाही के स्तर पर पहल शुरू हो गई है और भविष्य में इस बात की ज्यादा संभावना है कि वन निगम में नेताओं को अध्यक्ष के पद पर मनोनीत न किया जाए या फिर अगर किया भी जाता है तो उनके अधिकार लगभग शून्य ही होंगे। ऐसे ने हरीश धामी को अपने राजनीतिक पुनर्वास के लिए बाद  वन निगम के बजाए कोई दूसरी कुर्सी तलाशनी पड़ सकती है।

बहरहाल पुष्कर सिंह धामी के पास अभी उप चुनाव लड़कर विधायक चुने जाने तक के लिए 6 माह का पर्याप्त वक्त है। देखने वाली बात यह होगी उनके लिए कौन भाजपाई अपनी सीट छोड़ सकता है। लेकिन यदि उनकी नजर कांग्रेस से एक विधायक लाने पर है तो उसके लिए सबसे संभावित चेहरा फिलहाल हरीश धामी ही नजर आते हैं।

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