पहाड़ी क्षेत्रों में भी धूम धाम से मनाया राज्य स्थापना दिवस

सतीश डिमरी गोपेश्वर  (चमोली)

     उत्तराखंड राजकीय स्नातकोत्तर महविद्यालय गोपेश्वर में राज्य स्थापना दिवस बड़े धूम धाम एवम उत्साह से मनाया गया। अनेकों कार्यक्रम किए गए, जिसमें उत्तराखंड की दिशा और दशा पर भाषण, कविता एवं विचार मंथन आदि कार्यक्रम रखे गए थे।

कार्यक्रम का नेतृत्व एन.एस.एस.  प्रभारी एवम नमामि गंगे स्वच्छता  नोडल अधिकारी डॉ. बी. सी.एस. नेगी जी ने किया संचालन असिस्टेंट प्रो. दर्शन नेगी जी ने किया। निर्णायक मंडल में डॉ. जगमोहन नेगी जी, डॉ. एस. एस. रावत, डॉ. गिरधर जोशी आदि रहे।

महा विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य एम. के. उनियाल जी ने उत्तराखंड के आन्दोलन के इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डाला तथा उत्तराखंड की आज की स्थिति पर खेद प्रकट किया।

उनका कहना था, कि उत्तराखंड का आन्दोलन किन विषम परिस्थिति में हुआ था, लेकिन जिस उत्तराखंड के लिए इतनी शहादतें दी गई हैं, हम आज तक बेहतर जो चाहते थे वो उत्तराखंड नहीं बना पाए, इस बात पर प्रत्येक उत्तराखंड वासी को अफसोस है, आखिर हमारा यह राज्य किस दिशा में चला गया है। इसके लिए अब भी बक्त है कि हम सब अच्छे और उत्तराखंड के लिए समर्पित और प्रेम करने वाले प्रतिनिधि चुने।

इसके साथ ही  नमामि गंगे नोडल अधिकारी एवं  इस कार्यक्रम मैं मुख्य अतिथि के साथ मंच पर बैठे  सभी विद्वत जनों व छात्र छात्राओं का स्वागत करते हुए इस कार्यक्रम  के संयोजक डॉक्टरभालचंद सिंह नेगी ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड राज्य की स्थापना के लिए हमारे नौजवान महिलाओं व छात्रों ने क्रांतिकारी आंदोलन करके इस राज्य को बड़ी शिद्दत से पाया है लेकिन जो सपने हमारे वीर सपूतों आंदोलनकारियों की हुई आज भी 21 साल तक पूरी नहीं हो पाए हैं आज भी हमें जल जंगल जमीन के हक हकूक नहीं मिल पाए और नहीं पर्वतीय जिलों में आधारभूत सुविधाओं का विकास हो पाया है उत्तराखंड राज्य होने की बात केवल पलायन का विकास हुआ है जो उत्तराखंड के लिए घातक आज लोगों में देहरादून और हल्द्वानी बसने की मात्र होड़ है इसलिए यहां की गांव वीरान होने के साथ-साथ जंगली जानवरों की घर बनती जा रही अगर सरकार समय रहते नहीं संभली तो इसके घातक परिणाम होंगे जिससे यहां की खेती यहां की संस्कृति और यहां समाप्त हो जाएगी और बाहरी लोग यहां आकर बसने लगेंगे इसलिए नीति निर्माताओं को समय रहते हुए उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों की विकास की नई नीति और नियम तय करने होंगे तभी हम उत्तराखंड की शहीदों के सपनों को सही रूप में साकार कर सकेंगे।

कार्यक्रम में छात्र छात्राओं ने भी बढ़ चढ़कर प्रतिभाग किया, जिनमें कि दीपिका, ज्योति, शिवानी, पवन सिंह, अक्षत तिवारी आदि छात्र छात्राओं ने कविता, भाषण उत्तराखंड चिंतन पर अपने विचार व्यक्त किए।  

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