यात्री को समय से नहीं पहुंचाने पर रोडवेज को तीस दिनों के अन्दर देना पड़ेगा हर्जाना।

RMU आयोग के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह दुग्ताल और सदस्य विमल प्रकाश नैथानी ने आदेश जारी करते हुए कहा कि यात्री को 2426 रुपये वापिस करें। साथ ही मानसिक क्षतिपूर्ति दस हजार रुपये और तीन हजार रुपये वाद व्यय का भी भुगतान करें। 30 दिन के अंदर इसका भुगतान करना है। 30 दिन के अंदर भुगतान नहीं करने पर विभाग को नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के आधार पर यात्री को पैसे देने होंगे।

देहरादून आईएसबीटी से चली उत्तराखंड परिवहन निगम (रोडवेज) की एक बस नेपाली फॉर्म तिराहे पर निर्धारित समय से देरी पर पहुंची। इसके चलते एक यात्री अपनी कंपनी में समय से नहीं पहुंच सके। कंपनी ने एक दिन का वेतन काट दिया।

परेशान यात्री ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में इसकी शिकायत की। आयोग ने सभी दलीलें सुनने के बाद परिवहन निगम पर 15,426 रुपये का हर्जाना लगाते हुए एक माह के भीतर यात्री को ये पैसे देने का आदेश जारी किया है।

उपभोक्ता ( बस यात्री) यशवंत सिंह पुत्र बलवंत सिंह निवासी ग्राम रतनपुर पोस्ट नया गांव शिमला बाईपास रोड हाल पता हरि आश्रम कॉलोनी ग्राम बावली कलंजरी नियर पतंजलि योग पीठ हरिद्वार ने उत्तराखंड परिवहन निगम के महाप्रबंधक और परिवहन निगम हरिद्वार डिपो के सहायक प्रबंधक के खिलाफ आयोग में शिकायत की थी।

परिवादी अधिवक्ता नरेंद्र कुमार के अनुसार, 20 सितंबर 2018 को यशवंत सिंह आईएसबीटी देहरादून से हरिद्वार जाने वाली उत्तराखंड परिवहन निगम की बस से दोपहर 12 बजे निकले। यात्री ने आईएसबीटी से नेपाली फार्म तिराहा तक के लिए 76 रुपये का बस का टिकट लिया। बस परिचालक से पूछा कि क्या 1:40 बजे तक नेपाली फार्म तिराहा तक छोड़ देंगे, क्योंकि कंपनी की गाड़ी इसके बाद वहां से चली जाएगी। परिचालक ने निर्धारित समय से काफी पहले ही नेपाली फार्म पहुंचाने की बात कही, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बस देरी से पहुंची।

इसके चलते यशवंत सिंह की कंपनी वाली गाड़ी छूट गई। इसके बाद वे नेपाली फार्म से मजबूरी में उसी बस से 24 रुपये और बस किराया देते हुए हरिद्वार पहुंचे। इसके बाद 150 रुपये में ऑटो बुक करते हुए कंपनी पहुंचे, ताकि कंपनी ड्यूटी करने की अनुमति दे सके। लेकिन कंपनी ने देरी की वजह से एक दिन का वेतन काट दिया। यानी उस दिन यात्री का 2426 रुपये का नुकसान हुआ परेशान होकर बस यात्री यशवंत ने उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में इसकी शिकायत की।

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