सड़क निर्माण में ब्लास्टिंग के कारण आपदा की गिरफ्त में आया गांव।

सतीश डिमरी गोपेश्वर (चमोली)

उमट्टा गांव में वर्ष 1999 से सड़क निर्माण का कार्य प्रारम्भ हुआ। समय समय पर अधिक बारिश आने के कारण सड़क  टूटती रहती है, जिस कारण क्षति ग्रस्त सड़क पर निरमाणाधीन कार्य होते रहते हैं।

ग्रामीणों का मानना है कि वर्ष 2011 में जब क्षतिग्रस्त सड़क का निर्माण किया गया था, उस दौरान पत्थर आदि तोड़ने के लिए ब्लास्टिंग का प्रयोग किया गया, जिससे कि आज पूरा गांव प्रभावित होकर मकानों की आधार शिला हिल चुकी है और गांव भी आपदा ग्रसित हो चुका है।गांव की जमीन धीरे-धीरे अपनी जगह छोड़ रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब से सड़क पर ब्लास्टिंग का प्रयोग किया गया है, तब से ऐसी स्थिति बन गई है, इसके साथ ही उनका कहना है, कि सड़क पर ठीक तरह से दीवालें नहीं दी गई है, जो कि सिर्फ औपचारिकता पूर्ण दीवालें रखी गई हैं, यह भी एक कारण गांव की जमीन के धसने के साथ ही मकानों के प्रभावित होने का है।

अब ग्रामीणों का कहना है, कि भविष्य में यदि सम्बन्धित विभाग द्वारा कार्य किया जाएगा तो ग्रामीणों को विश्वास में लिया जाए, जिससे कि सड़क पर पक्की दीवाल बनाई जाए। साथ ब्लास्टिंग का प्रयोग न किया जाय। ब्लास्टिंग के कारण गांव को तो खतरा है ही, लेकिन पर्यावरण भी इससे सुरक्षित नहीं रह सकता।

ग्रामीणों का यह भी मानना है, कि इस निर्माण कार्य से कई ग्रामीणों की मकान क्षति ग्रस्त हो गए हैं,  वर्षात के दिनों में अलग से भय बना रहता है।

वीणा देवी डिमरी का कहना है कि इसी कारण उनका मकान भूकम्प के झटके से क्षतिग्रस्त हो चुका है, उनके साथ कोई भी नहीं है, दो लड़कियां है, जो कि अपनी बात आगे पहुंचाने में असमर्थ हैं, वह एक असहाय सी महसूस करती हैं, कि कोई उनकी बात नहीं सुन रहा है।  इनके अलावा गांव के भुवन डिमरी, सुबोध डिमरी, बद्री प्रसाद, उर्मिला देवी डिमरी, सोपती देवी डिमरी सपना देवी, गिरधर डिमरी, मंगी लाल डिमरी, पुष्पा देवी, रेखा देवी के मकान क्षतिग्रस्त के साथ ही जमीन प्रभावित हुई है।

सड़क के कारण क्षतिग्रस्त स्थलीय निरीक्षण करने हेतु पर्वतजन टीम के साथ ग्रामीण महिलायें एवम ग्राम प्रधान महेंद्र कुमार मौजूद रहे, महिलाओं में अनिता डिमरी, रेखा डिमरी, सुनिता डिमरी, हेमलता डिमरी, वीणा देवी, बबिता डिमरी, सुनिता डिमरी आदि ने अपनी बातों रखने सड़क के सम्बन्ध जानकारी उपलब्ध करवाई।

उनको अब आशा है कि मीडिया के माध्यम से अपना बात पहुंचाकर सिस्टम को, वो उनके गांव की सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाएंगे क्योंकि उनका कहना है कि उन्होंने विभिन्न माध्यमों से अपनी समस्या को पहुंचाई है, लेकिन देखने तक नहीं, उन्हें उपेक्षित किया गया। \

अब चुनाव नजदीक आने वाले है अनेकों जन प्रतिनिधि गावों में भ्रमण के लिए आएंगे, लेकिन इस बार हम बहकावे में नहीं आएंगे।

 

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