सरकारी राशन विक्रेता अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर।

रिपोर्ट /हर्ष मणि उनियाल 

पर्वतीय सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता कल्याण समिति के आह्वान पर प्रदेश भर के पर्वतीय 9 जिलों में सरकारी राशन विक्रेता अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है।

 

घनसाली विधानसभा के अंतर्गत बेलेश्वर बाजार में स्थित सरकारी गोदाम के बाहर सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता संघ द्वारा लगातार 14वें दिन क्रमिक अनशन जारी है।

 

अनशन पर बैठे समिति के लोगो ने बताया वह लोग 27 सितंबर 21 से क्रमिक अनशन पर तथा 01 सितंबर 21 से हड़ताल पर चल रहे है।

 

आपको पहले यह बता दे कि किन मांगो को लेकर अनशन कर रहे है राशन विक्रेता।

 

1:- सबसे बड़ी मांग राशन विक्रेताओ को सम्मानजनक मानदेय दिया जाय।

 

सवाल मनरेगा में कार्य करने वालो को भी प्रतिदिन 204 रूपये मिल रहे है, ऐसे में उन्हें क्यों नहीं।

 

2:- सभी योजनाओ में लाभांश को 300 रूपये प्रति कुंतल दिया जाय।

 

3:- दुर्गम क्षेत्र होने के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में दुर्घटनाओ की हमेशा संभावनाएं बनी रहती है।

 

अतः प्रत्येक राशन विक्रेता का एवं राशन का दस लाख का बीमा कराया जाय।

 

4:- सभी गोदामो में इलेक्ट्रॉनिक तराजू लगाये जाय।

 

अभी तक बाबा आदम के ज़माने के तराजू से होता आ रहा राशन मापन का कार्य।

 

सवाल-डिजिटल युग आखिर राशन विक्रेताओ के लिए क्यों नहीं आया।

 

5:- सभी राशन विक्रेताओ को कोरोना वारियर्स घोषित कर सम्मानपत्र जारी किया जाय।

 

सवाल:- अन्य कर्मियों को दिए जाने को लेकर पुछा कहा है सबका साथ,

 

संक्रमण काल में लोगों के बीच रह कर किया था राशन बांटने का कार्य।

 

खुद को तथा परिवार को इस संक्रमण काल में भारी जोखिम में रख कार्य किया।

 

अभी तक् किराया भाड़ा तक सरकार द्वारा नहीं दिया जाने बड़े रोष का कारण।

 

6:-सभी राशन विक्रेताओ को दुकान का भाड़ा , बिजली का बिल ,रिचार्ज एवं सभी योजनाओ का बकाया का भुगतान किया जाय।

 

इस पूरे मामले में प्रदेश कार्य समिति के मुख्य सलाहकार ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाते हुए कहा कि बार बार अनुरोध एवं पत्राचार तथा अन्य उचित माध्यमो से सरकार के सामने बात रखे जाने से लेकर आजतक कोई राहत नहीं मिल पा रही है तथा लगातार इस बात को पुरजोर तरीके से रखने के बाद भी उनकी मांग कभी नहीं सुनी गयी।

 

उनका कहना था कि पूर्व में कई बार राशन विक्रेताओ को पूर्व मुख्यमंत्री खंडूरी जी के कार्यकाल से लेकर , पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत जी के  जिनके कार्यकाल में भी घोषणा की गयी लेकिन आजतक अमल नहीं हुआ, वही उन्होंने मात्र 18 रुपये लाभांश पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार उनका शोषण कर रही है।

 

ऐसे में छोटे डीलरों को बहुत नुकसान उठा रहा है उसके सामने अपने परिवार को पालने का संकट पैदा हो गया है।

 

कोरोना कॉल में सरकार के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर कार्य किया गया।

 

ऐसे में जहाँ सरकार द्वारा राशन विक्रेताओ को कोरोना वारियर्स घोषित कर सम्मान दिया जाना चाहिए था उलट इसके सरकार द्वारा 2 साल का किराया भाड़ा ही नहीं दिया गया है।

 

ऐसे में वह सड़क पर आ चुके है कंगाल हो चुके है।

 

राशन विक्रेता घोर संकट में आ चुका है ऐसे में सरकार द्वारा उन पर राशन का चालान लगाने की बात कही जा रही है जबकि राशन डीलर कर्जे के बोझ तले डूबा हुआ है ऐसे में वह चालान के लिए अब पैसे कहाँ से लायेगा।

 

10 लाख रूपये के बीमा देने की बात की गयी है।

 

वही चमियाला राशन विक्रेता संघ के अध्यक्ष जबर सिंह ने कहा कि वह सभी सदस्यों की बात का समर्थन करते है आज की स्थिति में वह चालान लगाकर राशन उठाने में असमर्थ है।

 

वही इलेक्ट्रॉनिक कांटे को लेकर उनका कहना था कि हर जगह पर इलेक्ट्रॉनिक काँटा होना अतिआवश्यक है।

 

इससे कार्य में हर जगह पारदर्शिता आएगी।

 

वही उनकी मांग पूरी ना होने तक वह लगातार क्रमिक अनशन पर बैठे रहेंगे।

 

वही चमियाला संघ के उपाध्यक्ष विजय पाल सिंह सजवाण ने कहा कि उनकी स्थिति अब खराब हो चुकी वह और उनके साथी कर्जे में आ गए है।

 

वही सचिव जयपाल सिंह रावत का कहना था कि उनकी सभी मांगो को पूरा किया जाय।

 

कोरोना संक्रमण काल में किए गए कार्य के लिए उन्हें भी सम्मान मिले साथ ही सभी बकाया राशि का भुगतान हो।

 

उनकी स्थिति मनरेगा में कार्य करने वालो से ज्यादा खराब है लिहाजा उनकी मांगों पर ध्यान दिया जाय।

 

सरकार के सबका साथ और सबके सवाल पर उठाये सवाल।

 

आखिर उन्हें क्यों सड़क पर खड़ा कर दिया है ।

 

क्रमिक अनशन के 14वे चमियाला संघ के अध्यक्ष जबर सिंह

 

उपाध्यक्ष विजय पाल सिंह सजवाण, प्रदेश कार्यकारिणी के मुख्य सलाहकार राम प्रसाद सेमवाल, सचिव जयपाल सिंह रावत, कोषाध्यक्ष विजय पल सिंह सजवाण, सदस्य शूरबीर सिंह राणा , सदस्य विजेंद्र सिंह रावत, चन्दन सिंह पंवार, प्रेम चंद , साहेब सिंह असवाल एवं श्रीमती शिबि देवी मौजूद रही।

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