एसडीआरएफ टीम को फिर सलाम, शवों के साथ बिताई पूरी रात

“सुंदरढूंगा घाटी से पाँच ट्रैकरों के शव रेस्क्यू, चॉपर से कपकोट लेकर पहुंची एनडीआरएफ की टीम कपकोट चिकित्सालय में हो रहा इनका पोस्टमाटम” 

रिपोर्ट- राजकुमार सिंह परिहार 

बागेश्वर जिले के सुंदरढूंगा ग्लेशियर से एसडीआरएफ ने पश्चिम बंगाल के 5 पर्यटकों के शवों को रेस्क्यू कर लिया है। लेकिन स्थानीय गाइड खिलाफ सिंह दानू का कोई सुराग नहीं लग पाया है। पिछले छह दिनों के बाद जिला प्रशासन को रेस्क्यू अभियान में सफलता मिली है। देहरादून से आए आठ एसडीआरएफ के पवर्तारोही टीम ने सुंदरढूंगा घाटी में जमे हुए थे। मंगलवार की सुबह उन्हें सफलता हासिल हुई है। पांच शवों को रेस्क्यू कर लिया गया है। नैनी-सैनी से आए चौपर के माध्यम से उन्हें कपकोट लाया गया है। जिला मुख्यालय से कपकोट गई डाक्टरों की टीम उनका पोस्टमार्टम कर रही है। जैकुनी गांव के गाइड खिलाफ सिंह अब भी लापता है।रेस्क्यू दल ने बताया कि एक सुंदरढूंगा घाटी में बर्फबारी हो रही है। जिसके कारण रेस्क्यू अभियान में दिक्कत हो रही है। जैकुनी गांव के खिलाफ सिंह का अभी पता नहीं चल सका है। उसे भी खोजा जा रहा है। बरामद ट्रैकरों के शवों की अभी शिनाख्त बाकी है। उसके आधार पर उनके परिजनों से संपर्क किया जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, बंगाल के पांच पर्यटकों को साथ एक स्थानीय गाइड और चार पोर्टर खाती से सुंदरढूंगा ग्लेशियर ग्लेशियर के लिए 16 अक्टूबर को ट्रैकिंग पर निकले थे। लेकिन 20 अक्टूबर को अचानक मौसम खराब हो गया और सभी 10 लोग बर्फीले तूफान में फंस गए थे। इस दौरान चारों पोर्टर घायल हो गए थे। जो जैसे-तैसे अपनी जान बचाते हुए खाती तक पहुंच गए थे। वहीं, पश्चिम बंगाल के पांचों पर्यटकों की बर्फबारी के चलते मौत हो गई थी। जबकि, स्थानीय गाइड खिलाफ सिंह दानू लापता बताया जा रहा है । वहां से आए पोर्टर ने बताया कि गाइड खिलाफ सिंह के पास एक वॉकी टॉकी था, जिसकी लोकल रेंज पांच किमी की है। उसके माध्यम से उन्होंने जातोली के लोगों को 20 अक्टूबर शाम को सूचना दे दी थी। स्थानीय लोगों ने तभी प्रशासन को सूचित कर दिया था। मौसम खराब होने के चलते एसडीआरएफ को रेस्क्यू अभियान चलाने में काफी दिक्कत हो रही थी। कल एसडीआरफ को 5 पर्यटकों के शव मिल गए थे। और आज एसडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू अभियान शुरू करते हुए पांच बंगाली पर्यटकों के शवों को सुंदरढूंगा ग्लेशियर से चॉपर के माध्यम से कपकोट पहुचा दिया है। कपकोट मे ही शवो का पोस्टमार्टम किया जाएगा। गौर हो कि उत्तराखंड में सितंबर, अक्टूबर और नवंबर महीने में बड़ी तादाद में पर्यटक पहाड़ों का रुख करते हैं। बागेश्वर जिले में तीन स्‍थानों- सुंदरढूंगा, कफनी और पिंडारी ग्‍लेशियर में पर्यटक ट्रैकिंग के लिए जाते हैं, जो 15 सितंबर से 15 नवंबर तक कराई जाती है। बताया जा रहा है कि ये पर्यटक भी घाटी में ट्रैकिंग के लिए गए थे, जहां ये लोग फंस गए। और 5 पर्यटकों की वही मौत हो गयी थी, साथ ही गाइड खिलाफ सिंह लापता बताया जा रहा है।

♦️ एसडीआरएफ के पवर्तारोहियों को मिली सफलता— 

देहरादून से आई एसडीआरएफ की टीम में आठ लोग शामिल हैं। सभी पर्वातारोही हैं, जिसके कारण छठे दिन रेस्क्यू अभियान में सफलता हासिल हुई है। इसके अलावा कपकोट तहसील में तैनात एसडीएआरएफ की टीम भी उनको मदद कर रही है। इसके अलावा कुमाऊं मंडल विकास निगम के गाइड, ट्रैकरों के अलावा टीम में स्थानीय लोग भी शामिल हैं।

♦️ एसडीआरएफ टीम ने क्या-कुछ कहा —

एसडीआरएफ के 9 सदस्यीय दल पिछले दो दिनो से लगातार 4500 से 5000 फिट ऊंचाई पर सर्च अभियान चला रहा था। जहाँ पर लगातार बर्फ़बारी भी मौसम के अनुरूप निरन्तर जारी थी। एसडीआरएफ की चार सदस्यीय दल हृदयेश परिहार, दीपक पंत, दीपक नेगी, विजेंद्र कुटियाल ने सोमवार की देर शाम शवों के देखे जाने सम्बन्धी पुष्टि की, जिसके बाद  बर्फ़बारी होने से उन शवों तक पहुँचना मुश्किल बना रहा। जिसके बाद इस चार सदस्यीय दल ने वहीं बर्फ़बारी के बीच देविकुंड में अपना डेरा डाला तथा साथ के अन्य साथी जो उनसे नीचे थे उन्हें वापस भेज दिया। दल के सदस्य बताते हैं कि उनका सम्पर्क भी बर्फ़बारी के चलते टूटने लगा, अब उनके सामने शवों को अस्थाई बने हैलीपैड तक लाने की चुनौती थी जिस पर वह रात बारह बजे तक लगे रहे। जिस दौरान उन्होंने सौ मीटर, दो सौ मीटर व चार सौ मीटर से तीन शवों को निकालकर वहाँ तक पहुँचाया और उन्ही के बीच अपना टेंट लगाकर रात बिताई। सुबह उसी के आस-पास लगभग दो सौ मीटर के दायरे में सर्च अभियान चलाया गया। कैसे भी मृतक खिलाप सिंह की लाश ढूँढ पाये।

♦️ मृतक व्यक्तियों का विवरण —

मृतक व्यक्तियों में बंगाल के जिला हावड़ा बागवान के निवासी सागर दे उम्र 27 वर्ष, चंद्रशेखर दास 32, सरित शेखर दास 35 तथा प्रीतम राय उम्र 27 जो नदिया राजघाट के निवासी थे तथा साधुन बसाद उम्र 63 जो कोलकत्ता बिहाला का निवासी था, सभी की पहचान उनके परिजनों सुब्रोतो दे, अभिजीत राय एवं विश्वजीत दास द्वारा की गई।

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