सर्वे के पहले चरण में भाजपा की हालत पतली ।

सियासी हालातों का जायजा लेने के लिए भारतीय जनता पार्टी विधानसभा और लोकसभा चुनाव से पहले हालात के आकलन के लिए सर्वे कराती रही है।

इस बार भी मौजूदा सियासी हालात की थाह लेने के लिए भारतीय जनता पार्टी के गोपनीय सर्वे का पहला चरण पूरा हो गया है। जिसमें भाजपा की स्थिति उस की अपेक्षा के आस पास भी नहीं निकली। हालाँकि पहला चरण 10 सितंबर तक पूरा होना था लेकिन मैं पहले पूरा हो गया है। सर्वेक्षण का दूसरा चरण 15 सितंबर 30 अक्टूबर से शुरू होगा।

भाजपा आलाकमान ने प्रदेश में पार्टी की स्थिति और मौजूदा विधायकों की स्थिति के आकलन के लिए एक निजी मार्केट रिसर्च एजेंसी को सर्वेक्षण का काम सौंपा है ।इस एजेंसी को 40 40 दिन के तीन चरण के सर्वे का दायित्व सौंपा गया है ।

सूत्रों से पता चला हैं कि पहले चरण में आज चुनाव होने पर पूरे प्रदेश में भाजपा को मिलने वाले वोट का आकलन किया गया है।जिसका नतीजा अपेक्षा के मुताबिक नहीं रहा हैं ।

दूसरे चरण में मौजूदा विधायकों की स्थिति और अगर उन्हें बदलने की जरूरत है तो किसी अन्य को लेकर आकलन किया जाना है।तीसरे चरण में चुनाव में पीएम मोदी को या फिर स्थानीय नेताओं को चेहरा बनाने जाने पर आने का क्या असर होगा इसका आकलन किया जाएगा ।

भाजपा केंद्रीय नेतृत्व तीनों सर्वे के नतीजों से पार्टी अपना आकलन करेगी । जनता में नाराजगी नजर आई तो उसे दूर करने की कोशिश की जाएगी।इन सभी सर्वेक्षणों के नतीजों के हिसाब से भाजपा मिशन 2022 की अपनी रणनीति तैयार करेगी ।

इसके पहले भी किए गए एक आकलन में यह पाया गया कि भाजपा के 28 विधायकों ने पिछला चुनाव जीतने के बाद उन्हें जनता से कोई खास संपर्क साधा और ना ही अपने अपने विधानसभा क्षेत्रों में रहे।

विधायकों  की गैरमौजूदगी में वोटरों में नेताओं के खिलाफ अच्छा रोष है।

सूत्रों के अनुसार पार्टी हाईकमान को भी ऐसे विधायकों की लिस्ट भी भेजी जा चुकी है ।भाजपा हाईकमान इन विधायकों का मिशन 2022 से पत्ता काट सकती हैं ।

अब पहले चरण के बाद देखना दिलचस्प होगा की दूसरे और तीसरे चरण में क्या भाजपा की स्तिथि बेहतर होगी या उनमे भी औंधे मुँह ही गिरेगी ।

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