हाईकोर्ट ने पत्नी हत्या के निचली अदालत से सजायाफ्ता पति की सजा रखी बरकरार ।

स्टोरी(कमल जगाती, नैनीताल):-  उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने पत्नी की हत्या करने में निचली अदालत से आजीवन की सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए अभियुक्त की सजा को बरकरार रखा है।  साथ मे न्यायालय ने निचली अदालत के आदेश को सही मानते हुए अभियुक्त की अपील को निरस्त कर दिया है।     मामले की […]

स्टोरी(कमल जगाती, नैनीताल):-

 उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने पत्नी की हत्या करने में निचली अदालत से आजीवन की सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए अभियुक्त की सजा को बरकरार रखा है। 

साथ मे न्यायालय ने निचली अदालत के आदेश को सही मानते हुए अभियुक्त की अपील को निरस्त कर दिया है। 

   मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश आर.एस.चौहान और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खण्डपीठ में हुई।

   मामले के अनुसार बनखंडी ऋषिकेश निवासी महेश शर्मा ने 19 मई 2009 को थाना लक्ष्मण झूला में एफआईआर दर्ज कर कहा था कि उसकी भतीजी नीतू शर्मा अपने पति सुबोध शर्मा के साथ नीलकंठ के लिए घर से एक साथ चले थे। परन्तु शाम को वह घर वापस नही आई। 

जब उसके पति से नीतू के बारे में पूछा तो उसने कहा कि वह कहीं खो गयी है और उसे ढूढने पर नही मिली। 

दूसरे दिन पुलिस द्वारा नीतू के शव को ग्राम जोंक से बरामद कर लिया। जब पुलिस ने उससे सख्ती से पूछा तो उसने अपना जुर्म कबूल लिया। 

सुबोध शर्मा अपनी पत्नी व दो बच्चो के साथ वहीं सुसराल में रह रहा था। ट्रायल के दौरान इस मामले में 13 गवाह पेश हुए। 4 जुलाई 2014 को विवेक वी शर्मा सत्र न्यायाधीश पौड़ी गढ़वाल की कोर्ट ने अभियुक्त सुबोध शर्मा को आईपीसी की धारा 302 में आजीवन कारावास और 25 हजार का अर्थदण्ड धारा 201 में तीन साल की सश्रम कारावास व 10 हजार का अर्थण्ड से दण्डित किया था। 

इस आदेश के खिलाफ अभियुक्त द्वारा हाइकोर्ट में 17  जुलाई 2014 को अपील दायर की । कोर्ट ने इस मामले में 3 अगस्त 2021 को  सुनवाई पूरी कर ली थी, जिसमे आज यह निर्णय दिया गया।

 

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