Uttarakhand News: 45 करोड़ की योजना पर लगाया पलीता! चहेतों को किया एडजस्ट

देहरादून/मसूरी। पर्यटन नगरी मसूरी में सीवरेज सिस्टम को मजबूत करने के लिए स्वीकृत 45 करोड़ रुपये की योजना में भारी अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। उत्तराखंड पेयजल निगम के इंजीनियरों पर आरोप है कि उन्होंने एक बड़े टेंडर के बजाय योजना को 18 हिस्सों में बांटकर वित्तीय नियमों की अनदेखी की और बजट की बंदरबांट […]

देहरादून/मसूरी। पर्यटन नगरी मसूरी में सीवरेज सिस्टम को मजबूत करने के लिए स्वीकृत 45 करोड़ रुपये की योजना में भारी अनियमितताओं का खुलासा हुआ है।

उत्तराखंड पेयजल निगम के इंजीनियरों पर आरोप है कि उन्होंने एक बड़े टेंडर के बजाय योजना को 18 हिस्सों में बांटकर वित्तीय नियमों की अनदेखी की और बजट की बंदरबांट की।

45 करोड़ की योजना को 25-25 लाख के टेंडरों में बांटा

जानकारी के अनुसार, पूरी परियोजना के लिए एक बड़ा टेंडर जारी करने के बजाय इंजीनियरों ने इसे 25-25 लाख रुपये के 18 छोटे टेंडरों में विभाजित कर दिया।

बाद में इन्हीं टेंडरों की लागत “प्राइस वेरिएशन” के नाम पर बढ़ाकर 75 लाख रुपये तक कर दी गई, जिससे पूरे प्रोजेक्ट की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

6 साल बाद भी अधूरा प्रोजेक्ट

इस योजना को धरातल पर उतारने में लगातार देरी हुई और छह साल बीतने के बाद भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पाया है।

इसके चलते न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ, बल्कि मसूरी के सीवरेज सिस्टम की गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है।

ऑडिट में बड़ा खुलासा, इंजीनियरों पर सवाल

हाल ही में हुई ऑडिट रिपोर्ट में इंजीनियरों की कार्यशैली पर कड़ी टिप्पणी की गई है।

रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं और नियमों की सीधी अवहेलना की गई। मसूरी डिवीजन में तैनात रहे अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता सभी इस मामले में सवालों के घेरे में हैं।

‘काम तेजी से करने’ का दिया गया तर्क

ऑडिट आपत्तियों पर इंजीनियरों ने सफाई देते हुए कहा कि काम को तेजी से पूरा करने के लिए परियोजना को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा गया था।

हालांकि, प्रोजेक्ट अब तक अधूरा होने के कारण यह तर्क भी कमजोर पड़ता नजर आ रहा है।

टेंडर सिस्टम पर भी उठे गंभीर सवाल 

ऑडिट रिपोर्ट में उत्तराखंड पेयजल निगम के टेंडर सिस्टम पर भी सवाल उठाए गए हैं।

एक ही योजना को 18 टेंडरों में बांटना नियमों के खिलाफ बताया गया है और पूरी प्रक्रिया को नियम विरुद्ध करार दिया गया है।

चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के आरोप

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि इंजीनियरों ने अपने पसंदीदा ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए यह तरीका अपनाया।

बड़े ई-टेंडर से बचने के लिए छोटे टेंडर जारी किए गए और बाद में उनकी लागत बढ़ाकर अधिक भुगतान किया गया।

एमडी का बयान: होगी सख्त कार्रवाई

इस मामले पर रणवीर सिंह चौहान ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है और इसकी गहन जांच की जा रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया से जुड़े सभी अधिकारियों से जवाब तलब किया जाएगा और संतोषजनक जवाब न मिलने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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