आधी रात को, आधे रास्ते मे उतार दी प्रसव पीड़िता। 108 का तेल खतम।

शर्मनाक उत्तरकाशी में 108 सेवा का तेल समाप्त , 3 बजे रात को आधे रास्ते में उतार दी प्रसव पीड़िता   चिरंजीव सेमवाल उत्तरकाशी  प्रखंड डुंडा में जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर थाती गांव में मनीषा को प्रसव पीड़ा हुई, जिसपर उनके परिजनों ने 108 सेवा को फोन किया और मनीषा को लेकर जिला […]

शर्मनाक उत्तरकाशी में 108 सेवा का तेल समाप्त , 3 बजे रात को आधे रास्ते में उतार दी प्रसव पीड़िता 
 चिरंजीव सेमवाल
उत्तरकाशी  प्रखंड डुंडा में जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर थाती गांव में मनीषा को प्रसव पीड़ा हुई, जिसपर उनके परिजनों ने 108 सेवा को फोन किया और मनीषा को लेकर जिला अस्पताल के लिए रवाना हुए लेकिन 108 के कर्मचारियों ने डुंडा में ही मनीषा को रात एक बजे ये कह कर एम्बुलेंस से उतार दिया कि गाड़ी में तेल खत्म हो गया है।
 आधी रात को  प्रसव पीड़िता के पति धनपति लाल ने उत्तरकाशी 108 सेवा को फोन किया तो वहां भी दूसरी गाड़ी उपलब्ध नहीं हो पाई। जिसके बाद किसी तरह से गांव के लोगों से मदद मांगी।  ग्रामीणों की गाड़ी से  3 घण्टे बाद जिला महिला अस्पताल पहुंचाया गया। इससे  परिजनों ने 108 सेवा के प्रति भारी नाराजगी जाहिर की है।
 इधर जिले के सीएमओ विनोद नौटियाल ने बताया कि  जिमेदार कर्मचारियों का स्पष्टीकरण मांगा गया है। लापरवाही मिलने पर कार्यवाही की जायेगी ।
 इस मामले मे जिलाधिकारी डा. आषीश चौहान ने भी  108 के कर्मचरियों को फटकार लगाई और सीएमओ से इस मामले की गहनता से जांच करने के निर्देश दिए। तथा दोषी अधिकारी कर्मचारी पर कार्यवाही करने की बात कही।
इसमे  अहम सवाल यह है कि यदि रात में मनीषा के साथ कोई अनहोनी घटना हो जाती तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता। यह घटना जिले की बदहाल  स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
 यहां 108 व एंबुलेंस भी खस्ताहाल है। जन्माष्टमी मौके पर गंगोत्री मार्ग में हुई वाहन दुर्घटना मे दो घायलों के लिए जिला असपताल में एंबुलेंस तक नहीं थी। घायलों को ढाई घंटे तक एंबुलेंस की इंतजार करना पड़ा था। ये उत्तरकाशी का दुर्भाग्य नहीं तो क्या है ?
गौरतलब है कि कागजों में तो यहां 6 विकास खण्डों में सामुदायिक स्वाथ्य केन्द्र मोरी,पुरोला,नौगांव, चिन्यालीसौड़   डुण्डा,भटवाडी है ,लेकिन इन अस्पतालों में एक मामूली डिलीवरी करवाने के लिये यहां के लोगों को मीलों दूर देहरादून जाना पड़ता है। जिले में कई बार मरीज को भर्ती कराया जाता और सांय होते- होते जिला मुख्यालय के अस्पताल के डाक्टर मरीज को दून के लिये रेफर करने का फरमान सुना देते हैं। इतना ही नहीं यहां जो जांच सरकारी अस्पताल में हो सकती उन्हें जबरन निजी सेन्टरों में मे भेजा जाता है, जिसकी पूर्व में जांच भी चली, लेकिन कार्रवाई न होने से यहां के लोगों में रोष व्याप्त है।

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