एक्सक्लूसिव : उमेश कुमार पर शिकंजा कसने को मुख्यमंत्री का दिल्ली दौरा !

16 नवंबर को निकाय चुनाव का प्रचार समय समाप्त होते ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत कुछ आईएएस अधिकारियों और अपने कुछ खास लोगों को लेकर अचानक दिल्ली गए।  मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के दिल्ली दौरे पर देहरादून में भी तब कयासों का बाजार गर्म रहा, जब स्टिंग मास्टर उमेश कुमार को जमानत के बावजूद एक […]

16 नवंबर को निकाय चुनाव का प्रचार समय समाप्त होते ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत कुछ आईएएस अधिकारियों और अपने कुछ खास लोगों को लेकर अचानक दिल्ली गए।
 मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के दिल्ली दौरे पर देहरादून में भी तब कयासों का बाजार गर्म रहा, जब स्टिंग मास्टर उमेश कुमार को जमानत के बावजूद एक और मामले में रांची पुलिस झारखंड ले गई।
 उमेश कुमार के पास कथित स्टिंग से सरकार इस कदर परेशान हो गई है कि उसे कुछ भी नहीं सूझ रहा। जिन धाराओं में उमेश कुमार को उत्तराखंड की अदालत से जमानत मिली है, उसी प्रकार यदि रांची में ऐसे भी जमानत मिल जाती है तो सरकार के लिए यह और असहज स्थिति हो जाएगी।
 मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने खास लोगों के साथ दिल्ली में इस दिशा में कुछ गंभीर प्रयास किए हैं। पर्वतजन सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री निवास दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के वकील गौरव भाटिया जो कि कुछ दिन पहले ही भारतीय जनता पार्टी में आकर प्रवक्ता बने हैं, मुख्यमंत्री निवास में हुई बैठक में शामिल हुए।
 गौरव भाटिया के पिता उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह के सबसे अजीज लोगों में रहे हैं। उत्तर प्रदेश में एडवोकेट जनरल जैसे जिम्मेदार पदों पर रहे भाटिया के पिता ने ही मुलायम सिंह को सीबीआई से लेकर तमाम बड़े मामलों में बचाने का काम किया।
 गौरव भाटिया और उनके सहयोगी वकीलों के साथ दिल्ली स्थित मुख्यमंत्री निवास में इस मामले में नए सिरे से रणनीति बनाने की चर्चा चरम पर है।
 मुख्यमंत्री की ओर से अब इसे अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ने के बाद गौरव भाटिया को इस मसले से जोड़ना कुछ नए इशारे करता है।
 मुख्यमंत्री की दिल्ली यात्रा का केंद्र बिंदु उमेश कुमार और स्टिंग ऑपरेशन होना तब और गंभीर हो जाता है जबकि इतना समय बीतने के बावजूद उत्तराखंड पुलिस और सरकारी तंत्र उमेश कुमार सिंह से कुछ भी हासिल नहीं कर पाया है।
 अब दिल्ली में हुई बैठक के बाद उमेश कुमार की घेराबंदी के लिए सुप्रीम कोर्ट के वकील गौरव भाटिया मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की कितनी मदद कर पाते हैं, यह तो समय के गर्भ में है किंतु उत्तराखंड सरकार द्वारा उमेश कुमार की इस स्तर पर जाकर घेराबंदी करने की बात से एक बात तो स्पष्ट हो गई है कि सरकार के भीतर कोई ऐसा डर जरूर बैठ गया है कि उसे उमेश कुमार द्वारा किए गए तथाकथित स्टिंग से बहुत घबराहट हो रही है।
 यदि वास्तव में अब इस स्तर पर जाकर उमेश कुमार की और घेराबंदी होती है तो सरकार को हर हाल में उससे कुछ न कुछ प्राप्त करना ही होगा, नहीं तो जब उमेश अपने पत्ते खोलेगा तो शायद सरकार के पास खाली  हाथ मलने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा ।

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