एक्सक्लूसिव: चैनल मालिक उमेश कुमार पर एक और मुकदमा

स्टिंग वाले प्रकरण पर छीछालेदर कराने के बाद सरकार ने उमेश कुमार के पुराने मामले खंगालने शुरू कर दिए हैं। रायपुर और राजपुर में दर्ज दो पुराने मामलों की फाइल खुलवाने के बाद अब नया मामला रांची से दर्ज हुआ है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से अपने मधुर संबंध बताने वाले अमृतेश सिंह चौहान ने […]

स्टिंग वाले प्रकरण पर छीछालेदर कराने के बाद सरकार ने उमेश कुमार के पुराने मामले खंगालने शुरू कर दिए हैं। रायपुर और राजपुर में दर्ज दो पुराने मामलों की फाइल खुलवाने के बाद अब नया मामला रांची से दर्ज हुआ है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से अपने मधुर संबंध बताने वाले अमृतेश सिंह चौहान ने रांची के अरगोड़ा थाने में उमेश कुमार के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कराई है। अमृतेश सिंह के अनुसार उनके मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से अच्छे संबंध है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत इससे पहले झारखंड के प्रदेश प्रभारी रहे हैं।

खुद को प्रदेश किसान मोर्चा का पूर्व अध्यक्ष बताने वाले अमृतेश सिंह ने मीडिया से कहा कि खुद को एक चैनल मालिक बताने वाले उमेश कुमार ने उन्हें व्हाट्सएप कॉल करके और मैसेज भेज कर लोकतांत्रिक सरकार गिराने के लिए जानकारियां मांगी और उनके गलत इस्तेमाल करने की साजिश रची।

बकौल अमृतेश,-“उमेश कुमार ने उनसे उत्तराखंड सरकार के खिलाफ जबरदस्ती सबूत मांगे और ऐसा नहीं करने पर ईडी के झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी थी तथा उनकी पत्नी को भी धमकी दी।”

यह समानता तो काबिलेगौर 

इससे पहले देहरादून में दर्ज स्टिंग कराने के मुकदमे में तथा रांची में हुए मुकदमे में एक समानता है कि दोनों एफ आई आर में लोकतांत्रिक सरकार गिराने की साजिश का जिक्र किया गया है।

यह दोनों एफ आई आर करने वाले खुद को उत्तराखंड के हितेषी बताते हैं। आमतौर पर ऐसा देखने में नहीं आता। आमतौर पर एफ आई आर कराते समय पीड़ित पक्ष सिर्फ अपने मामले में न्याय चाहने तक सीमित रहता है। उत्तराखंड के इन हितैषियों  का प्रयास वाकई काबिले गौर है।

“लोकतांत्रिक सरकार” और “विधि सम्मत चुनी गई सरकार” जैसे शब्द अभियोजन विभाग की शब्दावली है तथा उनके द्वारा अधिकतर प्रयुक्त होते हैं।

स्टिंग प्रकरण में एफ आई आर दर्ज कराने वाले आयुष गौड़ से जब पर्वतजन ने यह सवाल पूछा था कि क्या वह किसी के टूल हैं और क्या वह किसी के कहने पर एफआइआर करवा रहे हैं !

इस पर आयुष गौड़ से कुछ कहते नहीं बना था और उन्होंने “नो कमेंट” कह दिया था।

सरकारी राजनीतिक तथा कानून के गलियारों में अब इस प्रकरण ने गरम चर्चाओं का मोड़ ले लिया है। लोग इस पर चर्चा करने लगे हैं कि सरकार ने उमेश कुमार पर कमजोर मामले में हाथ डाल दिया। अभी चर्चाओं में एक बात तो साफ है कि कोई भी उमेश को दूध का धुला नहीं बताता, लेकिन इतना जरूर कहता है कि यदि फंसाना ही था तो आय से अधिक संपत्ति अथवा यौन उत्पीड़न से लेकर और धोखाधड़ी जैसे किसी मामले में फंसाया जा सकता था।

अब लोग यह भी चर्चा कर रहे हैं कि आखिर मुख्यमंत्री ने किस कच्चे व्यक्ति की सलाह पर यह कदम उठाया होगा !!

भले ही कोई व्यक्ति उमेश कुमार के खिलाफ वर्तमान में किसी भी कारण से एफ आई आर दर्ज करा रहा हो लेकिन इसे सरकार के इशारे का परिणाम ही कहा जा रहा है।

बहरहाल एफ आई आर में कितना दम है यह तो जांच अथवा कानून ही तय करेगा, किंतु अब धीरे-धीरे प्रकरण “उमेश कुमार बनाम मुख्यमंत्री और पूरी सरकार”  की शक्ल लेता जा रहा है। तमाशे की शक्ल लेते जा रहे इस मुकदमे में अब इसी बात का इंतजार हो रहा है कि ऊंट किस करवट बैठता है !

नकारात्मक नवम्बर 

किंतु इतना जरूर है कि नवंबर का फेस्टिव महीना समाचार प्लस के मुखिया उमेश कुमार द्वारा स्टिंग, भाजपा संगठन मंत्री संजय कुमार द्वारा यौन उत्पीड़न, और चमोली जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर भाजपा की हार जैसी तीन महत्वपूर्ण बातों के रूप में दर्ज किया जा रहा है।

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