एक्सक्लूसिव: महिला तीर्थयात्री ने खोली यात्रा व्यवस्था की पोल पट्टी।

यात्री पंजीकरण – ग्रीन कार्ड की ढुलमुल व्यवस्था !
उत्तराखंड आ रहे तीर्थ यात्रियों में पनपा असंतोष , अधिकारी बेखबर – बेपरवाह

– भूपत सिंह बिष्ट
प्रदेश की आर्थिकी को मजबूत कर रहे पर्यटन और तीर्थाटन उद्योग के प्रति अधिकारियों की घोर लापरवाही उत्तराखंड के आर्थिक और त्रिवेंद्र की संकल्प से सिद्धि तक की योजनाओं पर कुठाराघात है।
10 मई को बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारों धाम की यात्रा उत्तराखंड में शुरू हो चुकी है – चार धाम यात्रा में प्रशासन के ढुलमुल रवैये से यात्रियों में असंतोष पनपने लगा है।

जयपुर की एक महिला यात्री ने 12 मई के अपने अनुभव को मीडिया के साथ साझा करते हुए, भेदभाव, उपेक्षा और लापरवाही की शिकायत सड़क परिवहन विभाग (आर टी ओ) अधिकारियों से की है।


महिला यात्री सीमा ने लिखित शिकायत की है कि 12 मई को अपने परिवार के सदस्यों के साथ जयपुर , राजस्थान से बद्रीनाथ धाम की यात्रा पर आयीं है लेकिन रूड़की पास करने के बाद आरटीओ कर्मचारियों ने उन्हें वापस 20 – 25 किमी भेजा कि पहले उत्तराखंड बार्डर पर अपने यात्रियों का पंजीकरण कराकर आयें। इस उलझन में यात्रा के कीमती दो घंटे बरबाद हो गए।
13 मई को ऋषिकेश में उनकी गाड़ी को यह कहकर आगे नही जाने दिया कि टैक्सी गाड़ी के ड्राइवरों को ट्रेनिंग लेनी पड़ेगी और ग्रीन कार्ड बनाना होगा। इस प्रक्रिया में पूरे पांच घन्टे बरबाद हो गए और बद्रीनाथ धाम न पहुँच पाने पर हमारी होटल बुकिंग के पैसे भी बरबाद चले गए।
तीर्थयात्री की परिवहन विभाग से यह भी शिकायत है कि प्राइवेट गाडि़यों को बिना पंजीकरण और ग्रीन कार्ड के यात्रा में जाने की छूट है और दूसरे प्रदेशों की टैक्सी वाहनों के साथ भेदभाव हो रहा है।


इस वर्ष यात्रा के दूसरे ही दिन यात्रियों के कड़वे अनुभव उत्तराखंड सरकार और प्रशासन में पनपी काहिली बता रहे हैं — चारधाम यात्रा अंग्रेजों के जमाने से महापर्व के रूप में सुनियोजित ढंग से आयोजित की जाती रही है। चारधाम यात्रा के कारण ही उत्तराखंड देवभूमि कही जाती है।
उत्तर प्रदेश के जमाने से और आज भी प्रदेश में चार धाम यात्रा प्रमुख आर्थिक , सांस्कृतिक और राष्ट्रीय आयोजन बना हुआ है। इस बार दस लाख से अधिक यात्रियों के उत्तराखंड आने की संभावना है सो परिवहन और पर्यटक विभाग के अधिकारियों को लाल फीताशाही छोड़कर अन्य प्रदेशों से पधार रहे यात्रियों के लिए जगह – जगह सहायता केंद्रों में और अधिक सक्रियता जरूरी है।

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