मैडम के चंपू, मैडम का मोबाइल

हल्द्वानी  वालों के लिए तो मैडम ही मुख्यमंत्री हैं। मैडम पुचकारना भी जानती है तो दुत्कारना भी आता है। पिछले दिनों पर्वतजन ने स्टेडियम को लेकर मैडम के घालमेल की खबर छापी तो मैडम डर गई। उन्हें लगा कि कहीं ये खबर विधानसभा चुनाव के दौरान उनकी जीत के समीकरण पर पानी न फेर दे। खतरा औरों से नहीं, बल्कि हल्द्वानी संस्करण के बड़े-छोटे अखबारों से ही था। फिर क्या था। चुनाव नजदीक आते ही हर छोटे-बड़े पत्रकार को ४० हजार रुपए और एक मोबाइल थमा दिया गया। लगभग एक जैसे मॉडल के मोबाइल पत्रकारों के हाथ में दूर से ही चमक जा रहे हैं और सामने वाला उन्हें कुछ खास भेदभरी नजरों से ऊपर से नीचे देखने के बाद अपनी नजरें पत्रकार के हाथ में पकड़े मोबाइल पर टिका देता है। कुछ पत्रकारों ने तो इन तीखी नजरों से बचने के लिए गिफ्टेड मोबाइल अपनी बीबियों व अन्य रिश्तेदारों को पकड़ा दिए हैं। इधर मैडम हैं कि मोबाइल थमाया है तो हक से रात-बेरात, वक्त-बेवक्त फोन करके निर्देश भी दे रही हैं। चुनाव का खेल खत्म हो गया। पत्रकारों का पैसा हजम हो गया। अब मैडम का फरमान सुनना कानों पर भारी पडऩे लगा है। किसी के पास फरमान से बचने के लिए कोई सुझाव हो तो इन्हें भी बताइए।

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