‘सरकार’ के फरमान को पलीता लगाते भाजपाई,ओएसडी,पीआरओ,मेयर

भूपेंद्र कुमार
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत होर्ल्डिंग और बैनरों से बदरंग शहर की बदहाली से आजिज आ गए हैं। उन्होंने नाराज होकर अफसरों को साफ निर्देश दिए कि पूरे उत्तराखंड से अवैध होर्डिंग को तत्काल हटा दिया जाए और शुरुआत उनकी तस्वीर वाली होर्ल्डिंग से ही की जाए। जाहिर है कि अवैध होर्डिंग्स के खिलाफ मुख्यमंत्री की नाराजगी अब जीरो टॉलरेंस की हद तक चली गई है।
 मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को शहरी विकास विभाग की बैठक के दौरान होर्डिंग हटाने के खिलाफ बाकायदा अभियान चलाने के निर्देश दिए और कहा कि नियम विरुद्ध होर्डिंग बैनर और पोस्टर बिल्कुल भी नहीं लगे रहने चाहिए किंतु पूरे शहर भर में मुख्यमंत्री के ओएसडी और पीआरओ ने मुख्यमंत्री की तस्वीर के साथ गणतंत्र दिवस और मकर संक्रांति की बधाइयां देने वाले होल्डिंग, बैनर, पोस्टर लगा रखे हैं।
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री के यह पीआरओ सरकार की उपलब्धियों को जनता तक ले जाने के बजाए अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने में लगे हुए हैं।
 यही कारण है कि मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी इन बैनर पोस्टरों को हटाने की कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। मुख्यमंत्री के आदेशों को भारतीय जनता पार्टी का प्रदेश मुख्यालय ठेंगा दिखाने में पीछे नहीं है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय के ठीक सामने राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की फोटो के साथ मुख्यमंत्री और प्रदेश संगठन के पदाधिकारियों की फोटो वाले विशालकाय होर्डिंग लगे हुए हैं। भाजपा कार्यालय के ठीक सामने की दीवार पर लगे यह पोस्टर मुख्यमंत्री के आदेश को मुंह चिढ़ा रहे हैं। इन्हीं होर्डिंग में एक होर्डिंग खुद नगर निगम के मेयर विनोद चमोली का भी लगा हुआ है। जाहिर है कि यह सभी होल्डिंग अवैध हैं और नियमों के विपरीत लगे हुए हैं।
किंतु नगर निगम तथा शहरी विकास विभाग के अधिकारियों ने इन्हें हटाने की जरूरत नहीं समझी। मुख्यमंत्री का आदेश अहम समय में आया है। यह समय मुख्यमंत्री के आदेशों के लिए बिल्कुल अनुकूल समय है। क्योंकि निकाय चुनाव सर पर हैं और शहर भर के नगर पालिका अध्यक्ष और मेयर पदों के दावेदारों सहित हजारों की संख्या में पार्षद पद के दावेदारों ने भी पूरे उत्तराखंड की शहर भर की दीवारों को बदरंग किया हुआ है। इन होर्डिंग बैनरों के अवैध होने के कारण सरकार को इसका राजस्व भी नहीं मिल रहा है।
 उदाहरण के तौर पर देहरादून में मेयर पद के तमाम प्रत्याशियों ने लाखों रुपए खर्च करके बाकायदा एक अभियान चलाकर शहर भर में अपने होर्डिंग और पोस्टर लगवाए हुए हैं। अब यदि मुख्यमंत्री के आदेशों के दबाव के बाद होर्डिंग हटाने का सिलसिला शुरू होता भी है तो ऐसे में इस बात की संभावना है की सरकार में अच्छी खासी पहुंच रखने वाले टिकट के दावेदारों के पोस्टरों बैनरों से सरकारी नुमाइंदे नजरें चुरा ले और जिन प्रत्याशियों को सरकार टिकट नहीं देना चाहती उन सब के बैनर और होर्डिंग अभियान के नाम पर उत्तरवा लिए जाएं। यदि ऐसा होता है तो यह यह भी एक तरह से मुख्यमंत्री के आदेशों का दुरुपयोग ही माना जाएगा।

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