बड़ी खबर:बीमा कम्पनी को झटका। मृत दंपत्ति के परिवार को देना होगा ₹71लाख मुआवजा

वर्ष 2022 में हुए एक रोड एक्सीडेंट में एक दम्पति की मौत हो गयी थी ,जिसके चलते उनके दो बच्चे अनाथ हो गए। अब इस मामले में एक अहम न्यायिक फैसला सामने आया है, जिसने सड़क हादसे के पीड़ित परिवार को बड़ी राहत दी है। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने वर्ष 2022 में हुए […]

वर्ष 2022 में हुए एक रोड एक्सीडेंट में एक दम्पति की मौत हो गयी थी ,जिसके चलते उनके दो बच्चे अनाथ हो गए। अब इस मामले में एक अहम न्यायिक फैसला सामने आया है, जिसने सड़क हादसे के पीड़ित परिवार को बड़ी राहत दी है। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने वर्ष 2022 में हुए दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाले दंपत्ति के परिजनों को ₹71.39 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया है।

यह फैसला सड़क हादसों में जिम्मेदारी तय करने का मजबूत उदाहरण है,इसके साथ ही पीड़ित परिवारों के लिए न्याय पाने की उम्मीद के रूप में इसे देखा जा सकता है । और ये फैसला बीमा कंपनियों को जवाबदेह बनाने की दिशा में अहम कदम होगा

पूरा मामला:-

यह मामला 28 मार्च 2022 को पंतनगर क्षेत्र के किच्छा-पंतनगर रोड पर हुए भीषण सड़क हादसे से जुड़ा है। न्यू जवाहर नगर, नगला निवासी अमित सक्सेना अपनी पत्नी दीप्ति सक्सेना और दो बच्चों के साथ बरेली जा रहे थे। तभी गोकुल नगर के पास सामने से आ रही तेज रफ्तार कार ने उनकी गाड़ी को टक्कर मार दी।

हादसा इतना भयानक था कि इसमें अमित सक्सेना की मौके पर ही मौत हो गयी ,जबकि पत्नी दीप्ति सक्सेना और दोनों बच्चों को गंभीर रूप से घायल अवस्था में हॉस्पिटल ले जाया गया। जहां उपचार के दौरान दीप्ति सक्सेना ने भी दम तोड़ दिया । इस हादसे के बाद दोनों मासूम बच्चे अनाथ हो गए।

इसके बाद मृतक अमित सक्सेना के भाई रूपम सक्सेना ने बच्चों के संरक्षक के रूप में याचिकाएं दायर की थीं मामले की सुनवाई मुकेश चंद आर्य की अदालत में हुई। अदालत ने इस हादसे का जिम्मेदार वाहन चालक की लापरवाही को माना और बीमा कंपनियों को पीड़ित परिवार को कुल ₹71.39 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया

इस मुआवजे में दंपत्ति की मृत्यु पर क्षतिपूर्ति,बच्चों के इलाज का खर्च,भविष्य की देखभाल और आर्थिक सुरक्षा शामिल है यह मुआवजा रूपम सक्सेना द्वारा दायर की गयी चार अलग-अलग याचिकाओं के आधार पर तय किया गया

उत्तराखंड में लगातार बढ़ते सड़क हादसे चिंता का विषय हैं। तेज रफ्तार और लापरवाही अक्सर ऐसे हादसों की मुख्य वजह बनती है।

रुद्रपुर का यह फैसला सिर्फ एक मुआवजा आदेश नहीं, बल्कि न्याय की एक मजबूत मिसाल है। यह दिखाता है कि सड़क हादसों में पीड़ितों को न्याय मिल सकता है और दोषियों को जवाबदेह ठहराया जा सकता है।

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