खुलासा: जिस रूम मे पढते हैं,वहीं सोते हैं छात्र।सीवर, बदबू, बीमारी बोनस !

क्यों बीमार हो रहे उत्तरकाशी जिले मे नवोदय विद्यालय चिन्यालीसौड़ के छात्र ? उधार के भवन में चल रहा स्कूल।
भरे हुए सीवर पिट से फैलती दुर्गंध से बीमार हो रहे बच्चे और शिक्षक।
रात के समय बेहद कम रोशनी में पढ़ने को मजबूर छात्र।
एक बेड पर सोने को मजबूर दो बीमार छात्र।
  गिरीश गैरोला 
जीआईसी चिन्यालीसौड़ के उधारी के भवन में चल रहे राजीव गांधी नवोदय आवासीय  विद्यालय के छात्र अव्यवस्था के शिकार हैं। जिसके चलते पिछले सप्ताह से छात्र बीमार चल रहे हैं। बीमार छात्रों को  एक ही बेड पर दो-दो छात्रों के सोने से वायरल अन्य छात्रों में भी फैल रहा है। स्कूल परिसर में निर्मित सीवर टैंक का पिट भी भरने के बाद उबाल मार रहा है ,  जिसके चलते फैल रही बदबू से सर्दी के दिनों में ही छात्र बीमार होने लगे हैं। ऐसे में गर्मियों के दिनों में फैलने वाली बीमारी का अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है। स्कूल प्रशासन और उच्च अधिकारी भी कागजी कार्यवाही तक सीमित है।
उत्तरकाशी के बनचौरा में प्रस्तावित राजीव गांधी नवोदय विद्यालय विगत 8 वर्षों से जीआईसी चिन्यालीसौड़ के उधार में मांगे गए भवन में किसी तरह 105 छात्रों को पशुओं की तरह ठूंस कर चल रहा है। जनपद के सभी ब्लॉक से पढ़ाई में अव्वल छात्रों को प्रतियोगिता परीक्षा के बाद यहाँ प्रवेश तो मिल जाता है, किंतु उसके बाद उनकी सुध लेने कोई नही पहुंचता। 6 से 12 तक के 9 सेक्शन को पढ़ाई करने के लिए महज 7 ही कमरें मिले हैं। लिहाजा दो क्लास या तो बाहर मैदान में लगती है अथवा किसी एक कमरे मे दो क्लास एक साथ पढ़ाने की मजबूरी है।आलम ये है कि उसी कमरे में पढ़ना है और उसी में सोना भी है। टॉयलेट का पिट बेहद छोटा है और 6 महीने मे ही भर जाता है। जिसे खाली करना होता है । स्कूल परिसर में भरे हुए लैट्रिन पिट से उबल कर बाहर निकल रहे सीवर से फैल रही बदबू से न सिर्फ आवासीय विद्यालय के छात्र परेशान हैं   बल्कि जीआईसी चिन्यालीसौड़ के टीचिंग स्टाफ भी कई बार विभाग को शिकायत लिख चुके हैं।
 दरअसल सीवर का पिट भरने के बाद नालियों से बहते हुए स्कूल परिसर और जीआईसी की आवासीय कॉलोनी में बहने लगता है।सीवर की गंदगी से सर्दियों में ही बच्चे बीमार हो रहे हैं तो गर्मियों में क्या होगा ! अंदाज लगाया जा सकता है।
स्कूल के गार्ड सोहन सिंह ने बताया कि सीवर पिट से बदबू से सब परेशान हैं किन्तु कोई कार्यवाही नही होती।
जीआईसी के सहायक अध्यापक  मुकेश गुंसाई ने बताया कि पिट के भरने के बाद उसे नालियों में बहा दिया जाता है, जिसके कारण स्कूल की आवासीय कॉलोनी में रहने वाले  लोग मच्छर, बीमारी और बदबू से परेशान रहते हैं।
वहीं जगह के अभाव में बीमार बच्चों को एक साथ एक ही रजाई में एक बेड पर दो छात्रों के सोने की मजबरी है। जिसके कारण एक छात्र के संक्रमित होने पर अन्य छात्र भी बीमार हो रहे हैं। 105 छात्रों के लिए केवल 4 टॉयलेट ही हैं, जिसमे दो छात्रों के लिए और दो छात्राओं के लिए है । इतना ही नही रात के अंधेरे में बेहद कम रोशनी में छात्र – छात्राएँ  पढने को मजबूर हैं।। ऐसे में कम रोशनी के चलते उनकी नजर कमजोर पड़ना तय है। बीमार छात्र संदीप की माने तो बीमार होने पर छात्रों के अभिभावकों को ही उन्हें अस्पताल में दिखाने के लिए आना पड़ता है।
ऐसा नही है कि स्कूल में उच्च अधिकारी दौरे नही करते हैं, वे अपनी कागजी कार्यवाही जरूर पूर्ण करते हैं और छात्रों से  उनकी दिक्कत भी पूछते हैं किंतु उनका कभी समाधान कभी नही करते। स्कूल की छात्राएं अधिकारियों के इस रूख से बेहद नाराज हैं।
स्कूल के प्रभारी प्रचार्य संजीव कुमार कहते हैं कि बीमार छात्रों का नाम सिक रजिस्टर में दर्ज कर उन्हें अस्पताल में दिखाया जाता है किंतु मौके पर जांच में पाया गया कि बीमार छात्र या तो अस्पताल गए ही नही अथवा गए तो अपने पैरेंट्स के साथ। सीवर की गंदगी को प्राचार्य भी स्वीकार करते हैं। वह मानते हैं  सीवर पिट को दो बार वर्ष में साफ करना पड़ता है।
कम रोशनी  में पढ़ रहे छात्रों के लिए पहले तो प्राचार्य साफ इंकार करते हैं, किंतु रिकॉर्डिंग दिखाए जाने के बाद वह  बिजली वायर की फिटिंग को दोष देते हैं। वह कहते हैं कि जहां पर्याप्त होल्डर हैं, वहां बल्ब लगाए गए हैं ।
एक तरफ तो बेहतर शिक्षा के लिए निशुल्क व्यवस्था का आवासीय स्कूल खोल दिया गया, जहाँ हर महीने टीचर , खानपान,  बेडिंग आदि पर करोड़ों खर्च किया जा रहा है। वहीं छोटी छोटी समस्याओं की अनदेखी कर इस सरकारी महत्वपूर्ण योजना पर पलीता लगाया जा रहा है।

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