ढहने की कगार पर बडख़ोलू झूला पुल, ग्रामीण जान खतरे में डाल पहुंच रहे मुख्य मार्ग तक

जितेंद्र जोशी, सतपुली// नयार नदी में कटाव के कारण क्षतिग्रस्त बडख़ोलू झूला पुल की मरम्मत की तरफ नहीं है सरकार का ध्यान करीब 650 लोगों की आबादी को मुख्यमार्ग से जोडऩे वाला जर्जर बडख़ोलू झूला पुल कभी भी धराशाई हो सकता है। स्कूली बच्चों सहित रोजाना सैकड़ों ग्रामीण मजबूरन जान खतरे में डाल मुख्यमार्ग तक […]

जितेंद्र जोशी, सतपुली//

नयार नदी में कटाव के कारण क्षतिग्रस्त बडख़ोलू झूला पुल की मरम्मत की तरफ नहीं है सरकार का ध्यान

करीब 650 लोगों की आबादी को मुख्यमार्ग से जोडऩे वाला जर्जर बडख़ोलू झूला पुल कभी भी धराशाई हो सकता है। स्कूली बच्चों सहित रोजाना सैकड़ों ग्रामीण मजबूरन जान खतरे में डाल मुख्यमार्ग तक पहुंच रहे हैं।

2010 में नयार नदी में आई भयानक बाढ़ के कारण बडख़ोलू झूलापुल क्षतिग्रस्त हो गया था। बाढ़ से नदी में हुए कटाव के कारण एबाटमेंट झुकने के कारण पुल धनुष के आकार में एक तरफ  झुक गया। मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध न होने के कारण बडख़ोलू, रौतेंला, बेडपानी, अमेली, गढ़वाड़ी, अमेली, मंजगांव सहित कई गांवों के ग्रामीण रोजाना पुल से आवाजाही करने को मजबूर हैं।

बडख़ोलू निवासी गणेश काला बताते हैं कि  2012 झूलापुल के स्थान पर लौह सेतु के निर्माण के लिए तत्कालीन बीजेपी सरकार ने जीओ जारी किया गया था। 2016 में कांग्रेस सरकार ने भी 12.70 करोड़ की लागत से बनने वाले लौह सेतु को लेकर शासनादेश जारी किया, पर जीओ कभी वित्त स्वीकृति में तब्दील नहीं हो पाया। ग्राम प्रधान बडख़ोलू महेश्वरी देवी ने बताया कि जनप्रतिनिधियों के आश्वासनों से अजीज आकर ग्रामीणों ने मुख्यमार्ग पर चक्काजाम भी किया, पर प्रशासन की नींद नहीं खुली।

एंकरिंग से सीधा हो सकता है झूलापुल

कल्जीखाल के ब्लॉक प्रमुख महेंद्र सिंह राणा ने बीडीसी बैठक में लोनिवि के अधिकारियों को पुल की एंकरिग का सुझाव दिया था। एंकरिंग विशेष उपकरणों की मदद से झूलापुल पुल को सीधा करने की प्रकिया है।

विधायक भी है पुल निर्माण को लेकर गंभीर

विधायक पौड़ी मुकेश कोली ने खैरासैंण में सीएम के समक्ष लौह सेतु निर्माण की मांग उठायी थी, जिसको सीएम ने परीक्षण का हवाला देकर टाल दिया था। सदन में भी विधायक ने पुल निर्माण का मुद्दा उठाया।

कंधो पर ढोए जाते हैं बीमार और गर्भवती

ग्राम प्रधान बडख़ोलू महेश्वरी देवी ने बताती हैं कि धनुषाकार पुल पर पीनीस के माध्यम से गंभीर बीमारों और गर्भवती महिलाओं को ले जाना असंभव है। ऐसे में मजबूरन उनको कंधों पर ढोकर सड़क तक ले जाया जाता है।

पूर्व प्रधान गंभीर सिंह, महिपाल एवं सुनील संयुक्त रूप से बताते हैं कि गर्भवती महिलाओं व  बीमार व्यक्तियों को पीनिस की जगह कंधों पर ढोकर ले जाया जाता है, क्योंकि धनुषाकार पुल से एक साथ चार लोगों का गुजरना संभव नहीं है। जान जोखिम में डालकर इस पुल से रोजाना आवाजाही करने वाले ग्रामीण आक्रोशित होकर कहते हैं कि जनप्रतिनिधि चुनावों के समय गांव में आते हैं। इस दौरान वोट बैंक के लालच में उनका ्रमुख्य फोकस पुल निर्माण को लेकर रहता है और वे आश्वासन देकर चले जाते हैं, किंतु चुनाव के बाद सभी आश्वासन कोरे साबित होते हैं।

बनते रह गया था पुल

वर्ष 2016 में ठीक चुनाव से पहले हरीश रावत सरकार ने 12.70 के लौह सेतु सहित 10 किलोमीटर लंबे बडख़ोलू मोटर मार्ग को स्वीकृति प्रदान की थी, जिसके लिए टेंडर प्रक्रिया भी लगभग शुरू हो गई थी, पर सरकार बदलते ही पुल और मोटरमार्ग निर्माण कार्य एक बार फिर से अधर में लटक गया।

बरसात में नदी तैर कर पार करते है लोग बरसात के मौसम में पुल ढहने के भय और वैकल्पिक व्यवस्था के अभाव में बडख़ोलू, रौतेला, बेडपानी आदि गांवों के लोग नयार नदी को तैर कर पार करते है, पर सरकार है कि अभी बेखबर बैठी है।

”सरकार के द्वारा बडख़ोलू गाटर स्पान मोटर पुल हेतु पुन: परीक्षण कर प्राक्कलन तैयार करने के निर्देश मिले। एक हफ्ते के भीतर पुल निर्माण को लेकर प्राक्कलन तैयार कर शासन को भेजा जाएगा। जीएसटी लागू होने के कारण निर्माण धनराशि बढ़ सकती है, जो कि करीब 17-18 करोड़ के बीच होगी।”
– अनुपम सक्सेना, अधिशासी अभियंता, प्रांतीय खंड लोनिवि पौड़ी

Also Read This

Dehradun News: जन सेवा केंद्रों पर चला प्रशासन का डंडा , 4 सेंटर सील; कंप्यूटर-लैपटॉप भी जब्त

देहरादून: जन सेवा केंद्रों (CSC Centers) पर अनियमितताओं के खिलाफ देहरादून जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के निर्देश...

Uttarakhand Weather: इन सात जिलों में गरज-चमक के साथ बरसेंगे बादल ;अलर्ट जारी

देहरादून: उत्तराखंड में मौसम एक बार फिर करवट ले सकता है। मौसम विभाग ने राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश और आकाशीय बिजली को...

Related Posts