देखिए, रुद्रप्रयाग और दून में एक साथ ड्यूटी देंगे सुपरमैन गुरूजी!

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सुपरमैन टाइप गुरूजी अब देहरादून में ड्यूटी करने के साथ ही टिहरी, रुद्रप्रयाग व नैनीताल जैसे दूरस्थ जिलों के स्कूलों में भी अध्यापन करते हुए दिखाई देंगे।
आपको पढ़कर लग रहा होगा कि यह कारनामा तो केवल शक्तिमान ही कर सकता है, लेकिन उत्तराखण्ड में बिन शक्तिमान के भी ऐसे कारनामें संभव हैं। शिक्षक नेता मुकेश बहुगुणा ने भी इस तरह के अजीबोगरीब आदेशों पर सवाल खड़े किए हैं।
अभी तक ये शिक्षक विद्यालयी शिक्षा शिकायत निवारण एवं सुझाव प्रकोष्ठ में कार्योजित थे। गत 5 जून 2017 को उपनिदेशक माध्यमिक शिक्षा ने एक आदेश जारी कर सबको चौंका दिया है। इस आदेश के अनुसार संबंधित प्रवक्ता/सहायक अध्यापक को इस आशय के साथ कि निर्धारित प्रकोष्ठ के कार्यों के साथ अपने विद्यालय में अध्यापन कार्य भी करेंगे, ताकि अध्यापन कार्य में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न हो सके।
भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता शैलेंद्र जोशी राजकीय इंटर कालेज प्यूड़ा नैनीताल में तैनात हैं। भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता प्रणय बहुगुणा राजकीय इंटर कालेज बचनस्यूं रुद्रप्रयाग में तैनात हैं, जबकि सहायक अध्यापक कमलेश्वर प्रसाद राजकीय प्राथमिक विद्यालय डांडा बुडाली कीर्तिनगर, टिहरी गढ़वाल में तैनात हैं। इन शिक्षकों ने उक्त स्थानों पर गत एक व दो जून को कार्यभार भी ग्रहण कर लिया है।
देहरादून से रुद्रप्रयाग की दूरी करीब 180 किमी. है। देहरादून से कीर्तिनगर की दूरी करीब 142 किमी. है, जबकि देहरादून से नैनीताल की दूरी लगभग 285 किमीलोमीटर है।
अब सवाल यह है कि देहरादून से इतनी दूरी पर स्थित विद्यालयों में ये शिक्षक अपनी सेवाएं कैसे दे पाएंगे? और यदि ये शिक्षक इन विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं तो फिर वे विद्यालयी शिक्षा शिकायत निवारण एवं सुझाव प्रकोष्ठ में अपने दायित्वों का निर्वहन कैसे कर सकते हैं?
जाहिर है कि इन शिक्षकों को देहरादून में तैनात करने के उद्देश्य से ही उन्हें विद्यालयी शिक्षा शिकायत निवारण एवं सुझाव प्रकोष्ठ में तैनात किया गया, जबकि दूरस्थ जिलों के स्कूलों में उन्हें महज खानापूर्ति करने के लिए ही तैनाती दी गई है। ये शिक्षक अब उन स्कूलों में ज्वाइनिंग लेने के बाद से ही देहरादून रवाना हो जाएंगे।
कुल मिलाकर एक शिक्षक को दो-दो जगह तैनात करने के पीछे माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की मंशा पर भी कई सवाल खड़े करता है। निदेशालय की इस तरह की कार्यप्रणाली की सजा छात्रों को ही भुगतनी पड़ेगी।

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