न लॉलीपॉप न झुनझुना: डॉक्टरों ने बिना शर्त वापस ली हड़ताल

नौ दिन चले अढ़ाई कोस। नौ दिन से आ रही हड़ताल आखिर प्राइवेट चिकित्सकों ने वापस ले ली।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से वार्ता करने गए मेडिकल एसोसिएशन के सदस्यों के आगे झुकने से त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मना कर दिया और उनकी मांगों का परीक्षण करने के लिए वित्त मंत्री प्रकाश पंत की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने की बात कहते हुए हड़ताल खत्म करने का अनुरोध किया। साथ ही यह भी जोड़ दिया कि यदि आपत्ति है तो डॉक्टर उच्चतम न्यायालय भी जा सकते हैं। और डॉक्टर अच्छे बच्चों की तरह मान भी गए।

क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट लागू न किए जाने की मांग को लेकर डॉक्टर हड़ताल पर गए तो सरकार ने हाई कोर्ट के एक आदेश के अनुपालन की बात कहते हुए एमडीडीए के माध्यम से उनके अस्पताल सील करने शुरू कर दिए।

इस कार्यवाही से घबराए डॉक्टर आखिरकार लाइन पर आ गए और शनिवार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट मध्यस्थता में मुख्यमंत्री से मिले। फिर मुख्यमंत्री से वार्ता करके अपनी हड़ताल वापस ले ली।

सरकार ने भी उनके प्रतिष्ठानों को सील करने कार्रवाई रोक दी है। एक ओर डॉक्टरों का कहना था कि एक्ट का पालन करने लायक सुविधाएं जुटाने के बाद उपचार काफी महंगा हो जाएगा, वहीं मुख्यमंत्री इस बात पर अड़े रहे कि एक्ट का पालन जरूर कराया जाएगा। हालांकि इसकी विसंगतियों का परीक्षण राज्य की स्थिति के हिसाब से कराने का भी उन्होंने आश्वासन दिया।

कमेटी बनाए जाने की बात को एक सम्मानजनक समझौता समझने में ही डॉक्टरों ने अपनी भलाई समझी और हड़ताल वापस ले ली।

पिछले 9 दिनों से प्राइवेट चिकित्सकों की हड़ताल के चलते सरकारी चिकित्सालय में मरीजों का दबाव काफी बढ़ गया था, अब मरीजों को कुछ राहत मिलने की संभावना है।

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