भेल चिकित्सालय ने जिंदा को बना दिया था मुर्दा, मानवाधिकार आयोग ने मांगा जवाब

बीएचईएल की साख पर बट्टा

कुमार दुष्यंत, हरिद्वार//

भारत हैवी इलैक्ट्रिक्लस चिकित्सालय द्वारा एक जीवित मरीज को मुर्दा घोषित करने पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भेल को नोटिस देकर जवाब तलब किया है। आयोग ने घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए आरोपी डाक्टर के खिलाफ कार्रवाई व पीडित परिवार को ‘कंपेनशेसन’ की भी जानकारी भेल प्रबंधन से मांगी है। आर्थिक संकट से जूझ रहे बीएचईएल की साख पर ये बड़ा बट्टा है।

पर्वतजन ने यह खबर तब प्रमुखता से प्रकाशित की थी। गत बारह जनवरी की रात सिडकुल से भेल के एक संविदा कर्मी कृष्ण(42) को तबीयत खराब होने पर परिजन भेल अस्पताल ले गये थे। जहां डाक्टरों ने ईसीजी करने के बाद मरीज को मृत घोषित करते हुए शव मोर्चरी भिजवा दिया था। सुबह जब परिजन शव लेने मोर्चरी पहुंचे तो उन्होंने बाडी पर वमन व मूत्र त्याग के लक्षण देखकर अस्पताल के डाक्टरों पर मरीज को समय पर चिकित्सा न देने के आरोप लगाते हुए अपने मरीज की मौत का दोषी भेल के डाक्टरों को ठहराते हुए कार्रवाई की मांग की थी। जिस पर भेल चिकित्सालय ने सफाई दी थी कि कभी-कभी मृत व्यक्ति में शरीर की आंतरिक गतिविधियों के कारण ऐसे लक्षण सामने आ जाते हैं ।

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हंगामा बढने के बाद पुलिस प्रशासन द्वारा जिला चिकित्सालय में कराए गये पोस्टमार्टम में मृतक की मौत का समय भेल चिकित्सकों द्वारा घोषित समय से बाद का निकला।जिसके बाद अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए भेल के महाप्रबंधक व अस्पताल के सीएमएस से जवाब तलब किया है।

एक वक्त भेल चिकित्सालय की अच्छी साख थी। हरिद्वार व आसपास के लोग ईलाज के लिए भेल चिकित्सालय को ही प्राथमिकता दिया करते थे। पहले ही अपने आर्थिक संकट के कारण जन-सरोकारों से दूर होते जा रहे हरिद्वार बीएचईएल की साख इस ताजा मामले से ओर धूमिल हुई है।

 

 

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