मासिक धर्म वाली महिलाओं के लिए ग्राम सभा ने बनाया अलग भवन। डीएम को पता चला तो हुआ बवाल

कृष्णा बिष्ट

चंपावत जिले के दूरस्थ घुरचुम गांव में मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को अलग रखे जाने के लिए बाकायदा ग्राम सभा ने रजस्वला केंद्र का निर्माण कराया हुआ था। सोमवार को कुछ लोग इसके निर्माण में हुई अनियमितता की शिकायत लेकर जिलाधिकारी से मिले तो जिलाधिकारी रणवीर सिंह चौहान भी चौंक गये। उन्होंने तत्काल जिला पंचायत राज अधिकारी को ऐसे और भवनों की पूरी जानकारी करके रिपोर्ट देने का आदेश जारी कर दिया और ग्रामीणों को जमकर फटकार लगाई।

उप जिला अधिकारी को भी आदेश दिए कि वह 18 जनवरी को इस गांव में जाकर पूरा जायजा ले और यहां पर जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाए। अब ग्रामीण इस केंद्र का नाम बदलने की तैयारी में लगे हैं। गौरतलब है कि सोमवार को डीएम के जनता दरबार में पहुंचे ग्रामीण रमेश चंद्र जोशी ने बताया था कि वर्ष 2016-17 में गांव में बने इस रजस्वला केंद्र में काफी अनियमितताएं बरती गई है। इसका निर्माण 14वें वित्त आयोग से हुआ था। इस पर ₹1,99,800 का खर्च आया था। 50 से अधिक महिलाओं वाले इस गांव में नेपाल के पीरियड हट्स और छोपदी प्रथा की तरह महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान परिवार से अलग रखा जाता है।कुछ दिन पहले नजदीक के नेपाल के एक गांव में ऐसे ही मासिक धर्म के दौरान एक झोपड़ी में रह रही महिला अपने दो बच्चों समेत दम घुटने से मर गई थी क्यों की झोपड़ी में कोई खिड़की नहीं थी और अंदर अंगीठी जलती रह गई थी।

घुरचुम के ग्राम विकास अधिकारी कौशल पांडे ने बताया कि यह एक तरह से महिला मिलन केंद्र है और इसमें महिलाओं के लिए अलग से एक कमरा बनाया गया है, जिसमें चारपाई, बिस्तर शौचालय तथा पानी आदि की व्यवस्था की गई है।

ग्राम प्रधान मुकेश जोशी का भी कहना था कि महिलाओं के साथ कोई भेदभाव नहीं होता, किंतु परंपरा के तौर पर महिलाओं को गौशाला या अन्य जगहों पर रहने के लिए मजबूर होना पड़ता था इसलिए उनकी सुविधा के लिए अलग भवन बनाया गया था। “महिलाओं को रखे जाने के लिए कोई जबरदस्ती नहीं है। महिलाएं इसका इस्तेमाल बिना किसी दबाव में स्वेच्छा से करती हैं।”

कल 18 जनवरी को इस गांव का मुआयना करने के लिए जाने वाली उपजिलाधिकारी सीमा विश्वकर्मा ने बताया कि वह ग्राम पंचायत के रजस्वला केंद्र का मुआयना करेंगी और ग्रामीण महिलाओं से भी मुलाकात करेंगे।

तीलू रौतेली पुरस्कार विजेता रीता गहतोड़ी ने भी इस क्षेत्र में जाकर महिलाओं को जागृत करने के लिए अभियान चलाने की बात कही है।

जिलाअधिकारी रणवीर सिंह चौहान ने बताया कि वह जल्दी ही ऐसे अन्य केंद्रों का पता लगाएंगे और इन क्षेत्रों में जागरूकता के अलावा सैनिटरी नैपकिन का भी वितरण करेंगे। जिलाधिकारी रणवीर सिंह इससे पहले देहरादून में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास निदेशालय के निदेशक तथा अपर सचिव भी रह चुके हैं। महिला सशक्तिकरण तथा बाल विकास मंत्री रेखा आर्य भी इसी लोकसभा सीट से टिकट दिए जाने की दावेदारी कर रही हैं। ऐसे में उम्मीद है कि इस क्षेत्र में यह घटना सामने आने के बाद महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान पैदा होने वाली विभिन्न स्वास्थ्य और सामाजिक समस्याओं से निजात मिल सकेगी।

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