मीडिया मैनेजर की धमक से फिर चित डबल इंजन!

16 फरवरी 2018 को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का दून विश्वविद्यालय में आपकी राय आपका बजट नाम से एक कार्यक्रम तय किया गया। इस कार्यक्रम को कवरेज करने के लिए सभी इलेक्ट्रोनिक व प्रिंट मीडिया के लोगों को आमंत्रित किया गया, ताकि बजट पर आपकी राय को वृहत रूप से प्रसार मिल सके।


तय कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत दून विश्वविद्यालय के खुले प्रांगण में पहुंचे। जहां पर बजट पर राय ली जानी थी। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को कवरेज करने आए मीडिया के लोग इससे पहले कि कवरेज के लिए अपने कैमरे कार्यक्रम की ओर लगाते, मुख्यमंत्री के मीडिया कॉर्डिनेटर दर्शन सिंह रावत और मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट वहां खड़े हो गए। इन दोनों के साथ-साथ सूचना विभाग के उपनिदेशक नितिन उपाध्याय भी पहुंच गए। फिर तीनों ने मीडिया कर्मियों को अपने कैमरे वहां से हटाने का आदेश दिया। मीडिया के लोग हतप्रभ थे कि आखिरकार ऐसा क्या हो गया कि पहले कार्यक्रम को कवरेज करने के लिए बुलावा भेजा गया और अब कवरेज से ही रोक दिया गया।


सहारा समय न्यूज चैनल के पत्रकार श्रीनिवास पंत ने जब मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट से पूछा कि आखिरकार कवरेज रोकने का क्या कारण है तो श्रीनिवास पंत के अनुसार रमेश भट्ट ने कहा कि उन्होंने किसी मीडियाकर्मी को यहां आमंत्रित नहीं किया है और वे यहां से जा सकते हैं। पंत ने जब भट्ट को बताया कि मुख्यमंत्री का कार्यक्रम कवरेज उनके आज के असाइनमेंट के डे प्लान का हिस्सा है तो भट्ट उन पर भड़कते हुए कहने लगे कि मीडिया में डे प्लान क्या होता है, मुझसे बेहतर कौन जानता है। इसके बाद पंत के साथ कुछ और मीडिया के लोगों ने सलाहकार भट्ट से पूछा कि आखिरकार ऐसी क्या नौबत आ गई कि पहले तो कवरेज के लिए बाकायदा निमंत्रण भेजा और अब कवरेज रुकवानी पड़ रही तो सलाहकार भट्ट ने बताया कि अब सरकार की ओर से मुख्यमंत्री का कार्यक्रम कवरेज करने के लिए एक कंपनी को हायर किया गया है, जो सभी कार्यक्रम कवरेज कर वीडियो फुटेज समाचार पत्रों व चैनलों को भेजेगी।


सलाहकार के इस जवाब के बाद आधे से अधिक पत्रकार कार्यक्रम छोड़कर चले गए। यह दूसरा अवसर था जब मीडिया को सरकारी कार्यक्रम से इस प्रकार बाहर रखा गया। इससे पहले मुख्यमंत्री निवास में आयोजित रैबार कार्यक्रम में भी मीडिया को कार्यक्रम से दूर रखकर तब मीडिया मैनेजर सुर्खियों में आए थे कि आखिरकार सरकार का कौन सा काम मीडिया से छुपाना चाहते हैं और लाखों रुपए वेतन व तमाम संसाधनों पर खर्च करने के बावजूद सरकार का सूचना विभाग क्यों काम नहीं कर पा रहा और आखिरकार मुख्यमंत्री की कवरेज के लिए अब बाहर से कंपनी हायर करने की क्या आवश्यकता पड़ी?

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