वीरान गांव मे होम स्टे योजना से लौटी रंगत

सीमांत जनपद उत्तरकाशी के गांव नटिन मे प्रकृतिक खूबसूरती के साथ पहाड़ी संस्कृति से रूबरू हो रहे हैं  पर्यटक गांव मे होम स्टे योजना पर काम  कर रहे ग्रामीण। पहाड़ी पारंपरिक शैली के भवनों ने पर्यटकों को ठहरने की योजना। विश्व प्रसिद्ध दयारा बुग्याल के बेस कैंप मे है नटिन गांव भले ही सरकार सूबे […]

सीमांत जनपद उत्तरकाशी के गांव नटिन मे प्रकृतिक खूबसूरती के साथ पहाड़ी संस्कृति से रूबरू हो रहे हैं  पर्यटक
गांव मे होम स्टे योजना पर काम  कर रहे ग्रामीण।
पहाड़ी पारंपरिक शैली के भवनों ने पर्यटकों को ठहरने की योजना।
विश्व प्रसिद्ध दयारा बुग्याल के बेस कैंप मे है नटिन गांव
भले ही सरकार सूबे मे पर्यटन योजना को विकसित करने के लिए लाई होम स्टे योजना को भूल चुकी है किन्तु उत्तरकाशी जिले के नटिन गांव के ग्रामीणों ने हार नहीं मानी है। गांव के जागरूक नौजवानों ने पारंपरिक शैली के भवन निर्माण कर पर्यटकों को यहां ठहरा कर उन्हे यहां  की प्राकृतिक  खूबसूरती के साथ यहां  की समृद्ध लोक संस्कृति के भी दर्शन कराने  की योजन बनाई है।
उत्तरप्रदेश से पृथक उत्तराखंड राज्य निर्माण के समय पर्यटन और बिजली उत्पादन को ही राज्य की आर्थिकी माना गया था। सामाजिक  कार्यकर्ता दिनेश भट्ट ने बताया कि पहाड़ मे देवी देवताओं की डोली के साथ ग्रामीणों के झूमने और सामूहिक रांसों और तांदी नृत्य देख कर देशी-विदेशी खूब आनंदित हो रहे हैं।
सदस्य क्षेत्र पंचायत राजकेन्द्र ने बताया कि क्षेत्र मे प्रचलित मँगसिर महीने के पांडव नृत्य और गैंडा खेल के साथ बैसाख महीने के मेले मे लगने वाले रांसों और तांदी  नृत्य की झलकी पर्यटकों को दिखाने की योजना पर ग्रामीण काम कर रहे हैं।
यदि विभाग से पर्यटन को बढ़ाने के लिए गाइड प्रशिक्षण मिल जाय तो स्थानीय युवाओं को आर्थिकी से जोड़कर पलायन पर लगाम लगाई जा सकती है। इसके अलावा विश्व प्रसिद्ध दायरा जाने वाले पर्यटकों को भी कुछ दिन गांव मे ठहराकर ग्रामीणों की आर्थिक  स्थिति मजबूत की जा सकती है।

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