समिट का सच -3 : देखिए वीडियो- खुद अडानी ने खोली इन्वेस्टर्स समिट की पोल पट्टी। समिट को बताया दिखावा 

इन्वेस्टर्स सम्मिट में भाग लेने के लिए उत्तराखंड आए गौतम अडानी ने समिट का एक ऐसा सच उजागर किया, जिससे यह साफ हो जाता है कि इस तरह के इन्वेस्टर्स समिट मात्र एक ट्रेड फेयर और मजमें से ज्यादा कुछ नहीं हैं।  गौतम अडानी ने ने मुख्यमंत्री तथा अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश से लेकर तमाम […]

इन्वेस्टर्स सम्मिट में भाग लेने के लिए उत्तराखंड आए गौतम अडानी ने समिट का एक ऐसा सच उजागर किया, जिससे यह साफ हो जाता है कि इस तरह के इन्वेस्टर्स समिट मात्र एक ट्रेड फेयर और मजमें से ज्यादा कुछ नहीं हैं।
 गौतम अडानी ने ने मुख्यमंत्री तथा अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश से लेकर तमाम वरिष्ठ अफसरों के सामने इन्वेस्टर्स समिट को मात्र एक दिखावा बताया।
 आप वीडियो में इस बात को साफ़ सुन सकते हैं। देखिए वीडियो:-

https://youtu.be/8R–fkB_4bk

गौतम अडानी ने मुख्यमंत्री से दो टूक कहा कि एयरपोर्ट साइड में ट्रैफिक काफी ज्यादा था और इससे उन्हें काफी परेशानी हुई अडानी ने साफ किया कि कोई भी प्रोजेक्ट सही ढंग से नहीं चल रहा है। किसी भी परियोजना में इन्वेस्ट करो तो तमाम तरह की दिक्कतें हैं।
 उदाहरण के तौर पर अडानी ने इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की ही बात कही थी। इसमें कम दिक्कतें नहीं है। वीडियो में अदानी को कहते हुए साफ सुना जा सकता है कि वह लोग तो केंद्र सरकार  के कहने पर इन्वेस्टर्स समिट में आ जाते हैं, बाकी इस में होना हवाना कुछ नहीं है।
 अडानी ने कहा कि वह तो सिर्फ केंद्र सरकार के कहने पर आए हैं और रात को ही अहमदाबाद वापस चले जाएंगे। अदानी ने साफ कहा कि जो भी इन्वेस्टर्स यहां आ रहा है वह यहां काम करने के लिए नहीं आ रहा है, बल्कि सिर्फ केंद्र सरकार के कहने पर आया है, क्योंकि उन्हें धंधा करना होता है  इसलिए वह आ जाते हैं, लेकिन होता कुछ नहीं है। अडानी के इस तरह के बयान के बाद एक बड़ी चुनौती यह भी है कि इस इन्वेस्टर्स समिट में राज्य सरकार को जितने निवेश के प्रस्ताव मिले हैं उसका एक प्रतिशत हिस्सा भी निवेश हो पाएगा या नहीं !!
इन आशंकाओं को इसलिए भी बल मिलता है क्योंकि  निवेशक ने उत्तराखंड सरकार के अधिकारियों के साथ जिन पत्रों पर साइन किए हैं उन पर कईयों पर  एमओयू  शब्द अंकित नहीं है  और ना ही इन्वेस्टमेंट करने के बारे में उनकी कोई स्पष्ट रूपरेखा अंकित है। यह केवल उनकी निवेश करने की इच्छा मात्र को ही दर्शाता है।
बेशक इस समिट को सफल बनाने में उद्योग विभाग के अधिकारियों तथा सूचना विभाग के अधिकारियों ने जी तोड़ मेहनत की। अपने मकसद में कामयाब भी रहे लेकिन उनके ऊपर हावी राजनीतिक लोगों ने कई ऐसे कदम उठाए, जिससे साफ लगता है कि इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन करने वाली उत्तराखंड सरकार कहीं ना कहीं इस समिट के प्रति वांछित रूप से गंभीर नहीं थी।
 यही कारण था कि इन्वेस्टर्स समिट में एक ओर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने वालों को भी समिट में शामिल होने का पास नहीं मिल पाया तो दूसरी ओर भाजपा के कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या इन्वेस्टर्स सम्मिट को परेड ग्राउंड में होने वाले ट्रेड फेयर जैसा आभास और एहसास कराने में लगी थी।
 इन्वेस्टर्स समिट में प्रेजेंटेशन के दौरान ही बिजली गुल हो गई तो राज्य सरकार के निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के दावों की भी हकीकत दिख गई।
 वहीं प्रवासी और स्थानीय निवेशकों की वांछित तवज्जो न मिलने से भी इन्वेस्टर्स समिट फीका रहा।
 अभी तक जितने भी इन्वेस्टर्स ने इन्वेस्ट करने में रुचि दिखाई है, वह भी अधिकांश एक तरह से इन्वेस्टर्स ने सिर्फ अपने फायदे वाले कार्य ही चुने हैं। इन कार्यों में उत्तराखंड को कोई फायदा नहीं होने जा रहा। आगामी धारावाहिकों में हम विभिन्न क्षेत्रों में इन्वेस्टमेंट और प्रस्तावों की पड़ताल करके धरातल पर होने जा रहे निवेश और रोजगार की संभावनाओं को तलाशने का प्रयास करेंगे।

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