सुपर एक्सक्लूसिव : समूह ग पर सरकार के दोगलेपन का खुलासा !!

उत्तराखंड सरकार समूह ग के पदों में स्थानीय स्तर पर पंजीकरण करने की शर्तो को बनाए रखने के लिए उच्च न्यायालय के आदेश के विरूद्ध उच्चतम न्यायालय में अपील करेगी ये तो अच्छा कदम है,किन्तु 26 दिसंबर की कैबिनेट बैठक में खुद ही सरकार ने समूह ग के पद खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पद को […]

उत्तराखंड सरकार समूह ग के पदों में स्थानीय स्तर पर पंजीकरण करने की शर्तो को बनाए रखने के लिए उच्च न्यायालय के आदेश के विरूद्ध उच्चतम न्यायालय में अपील करेगी ये तो अच्छा कदम है,किन्तु 26 दिसंबर की कैबिनेट बैठक में खुद ही सरकार ने समूह ग के पद खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पद को राजपत्रित घोषित कर दिया किसी पद को राजपत्रित करते ही सेवायोजन कार्यालय में पंजीकरण की अनिवार्यता खत्म हो जाती है।

क्या सरकार को अपनी गलती समझ में नहीं आ रही है ! कोर्ट के आदेश के खिलाफ तो उच्च न्यायालय पर

अपने आदेश के खिलाफ कहा जाओगे !

इस राज्य का दुर्भाग्य है कि सरकार ऐसा राज्य विरोधी निर्णय ले रही है।

क्या वास्तव में सरकार पैरवी  करेगी या मात्र पहाड़ की जनता को यू ही बरगलाती रहेगी, जबकि सरकार एक तरफ तो समूह ग के पदों को राजपत्रित कर रही है। जबकि कार्मिक विभाग, न्याय विभाग इसके पक्ष में नही था। दो बार कैबिनेट ने वापस किया पर वरिष्ठ अधिकारी के कहने पर सी एम ने मंजूरी दे दी इस पद को राजपत्रित करने से इसके समकक्ष पदों या इससे बड़े ग्रेड के पदों को भी राजपत्रित करने की मांग बढ़ गई है जो राज्य के युवा बेरोजगारों के हक में सही नही है।

इससे पहले कांग्रेस सरकार में भी सचिवालय के समीक्षा अधिकारी तथा अपर निजी सचिव के पदों को राजपत्रित किए जाने की पूरी तैयारी हो गई थी किंतु इस मुद्दे पर सचिवालय संघ ही दो फाड़ हो गया और भारी विरोध के कारण ऐसा नहीं हो पाया था।

इन पदों को राजपत्रित किए जाने के पीछे यही कारण था कि इन पदों की भर्तियां पूरे देश भर के लिए खोल दी जाएं।

ऐसा करने के पीछे सचिवालय के ही कुछ अफसर तथा उत्तराखंड लोक सेवा आयोग में बैठे कुछ अफसर शामिल थे बाद में भारी विरोध के कारण ऐसा नहीं हो पाया था, किंतु वर्तमान सरकार खुद ही ऐसा कर रही है।

यही नहीं उत्तराखंड में कई सरकारी नौकरियों के लिए ऐसी ऐसी क्वालिफिकेशन मांगे जाने की तैयारी है कि जो विषय उत्तराखंड के किसी भी विश्वविद्यालय में नहीं पढ़ाए जाते। राज्य बनने के 18 साल बाद सरकारी नौकरियों में ऐसी क्वालीफिकेशन मांगी जा रही है। इसके पीछे क्या कारण हो सकता है ! जाहिर है कि इसके पीछे उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार के कुछ ऐसे अफसर शामिल हैं जो चाहते हैं कि उत्तराखंड की नौकरियों में ऐसी डिग्रियां मांगी जाए जो सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही पढ़ाई जाती हैं, ताकि वहां के बेरोजगार युवाओं को यहां भर्ती कराया जा सके और उत्तराखंड के बेरोजगार युवक अप्लाई तक न कर सकें।

पर्वतजन ने स्वयं भी छह माह पहले कुछ अपर सचिव तथा मुख्यमंत्री कार्यालय को इस संबंध में आगाह किया था लेकिन अफसोस उन्होंने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया। बहरहाल पर्वतजन इस षडयंत्र पर जल्दी ही सबूतों के साथ एक दूसरी स्टोरी प्रकाशित करेगा।

यह मामला मुख्यमंत्री सहित उनके सलाहकारों और सचिवों और अपर सचिवों के भी संज्ञान में है और वही इसे कार्यान्वित कर रहे हैं, लेकिन किसी को भी उत्तराखंड के हितों की चिंता नहीं है। ऐसे में समूह ग की नौकरियों में हितों की बात करना और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कहना सबसे बड़ा दोगलापन है।

भारत के संविधान के मौलिक अधिकारों के अनुसार किसी भी व्यक्ति को देश के किसी भी हिस्से में जाकर रोजगार अथवा नौकरियां पाने का हक है किंतु षड्यंत्र के तहत मानकों में बदलाव किया जाना ताकि उत्तराखंड मे पढ रहे युवक प्रतियोगिता से ही बाहर हो जाएं,यह वाकई चिंतित करने वाला विषय है।

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