हवा में उड़ रहे नियम-कायदे

विभिन्न हैलीकॉप्टर कंपनियों पर उड्डयन विभाग का लाखों बकाया। वसूली में सुस्त है उड्डयन विकास प्राधिकरण

भूपेंद्र कुमार

उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण(यूकाडा) अपने हैलीपैडों और हवाई पट्टियों का किराया वसूलने के लिए ज्यादा सक्रिय नहीं है। यूकाडा की उदासीनता के कारण कई हैलीकॉप्टर कंपनियों ने हवाई पट्टियों का इस्तेमाल किया, लेकिन पार्किंग शुल्क नहीं चुकाया। अब यूकाडा इन कंपनियों से बकाया वसूलने के लिए हाथ-पांव मार रही है।
यूकाडा के मुख्य अभियंता जी. सितैया का कहना है कि ९ मई २०१४ से ३१ मई २०१५ के दौरान विभिन्न कंपनियों ने सहस्त्रधारा हैलीपैड पर पार्किंग की थी। उन सभी को बकाया के बिल भेज दिए गए हैं और अधिकांश ने या तो शुल्क जमा करा लिया है या फिर उनकी बकाया राशि का अगले बिलों में समायोजन करा लिया गया है।
सितैया स्पष्टीकरण देते हैं कि विभागीय स्तर से कार्यवाही होने तथा बिल तैयार करके भिजवाने में देरी होने के कारण समय से वसूली नहीं हो पाई। यूकाडा का उद्देश्य किसी फर्म को लाभ पहुंचाना नहीं था।

इन पर लाखों का बकाया

यूकाडा ने वर्ष २०१३ के जून माह में हैलीपैडों पर लैंडिंग, ठहरने, पार्किंग आदि सुविधाओं के लिए विभिन्न शुल्कों का निर्धारण किया था। इस मद में लगभग २६ कंपनियों ने इन सुविधाओं का लाभ लिया था, किंतु किराया चुकाते समय हीलाहवाली करनी शुरू कर दी। स्पान एयर ने पार्किंग और अन्य खर्चों को मिलाकर ५ लाख से अधिक भुगतान करना है तो सुमित एविएशन पर ४ लाख ३८ हजार से अधिक बकाया है। पवनहंस कंपनी पर ५ लाख ३२ हजार बकाया था, जिसमें से उसने मात्र ३ लाख ७० हजार भुगतान किया है। प्रीमियर प्रा.लि. और एरो एविएशन कंपनी पर यूकाडा का लगभग ४-४ लाख रुपए बकाया है।
एस्कार्ट कंपनी भी लगभग ७० हजार रुपए की बकायेदार है।
एयर चार्टर ने लगभग २ लाख ४० हजार का भुगतान करना है तो भारत होटल्स सहित प्रकाश एसोसिएट लिमिटेड भी यूकडा के बकायेदार हैं। एरोटेक एविएशन और ट्रांस भारत एविएशन पर लगभग २-२ लाख रुपए बकाया था, किंतु उन्होंने अभी तक मात्र लगभग एक-एक लाख रुपए ही भुगतान किया है।
चिंताजनक स्थिति यह है कि एक बार फिर से पर्यटन सीजन शुरू हो चुका है, किंतु पहले की ही बकायेदार इन कंपनियों से अभी तक वर्ष २०१३ से चली आ रही बकाया की ही वसूली तक नहीं हो पा रही है।
इन बकाया भुगतानों को लेकर कैग भी अपनी रिपोर्ट में आपत्ति लगा चुका है। कैग ने अपनी जांच में पाया था कि ९ मई २०१४ से ३१ मार्च २०१५ के दौरान विभिन्न कंपनियों के द्वारा सहस्त्रधारा हैलीपैड पर ६२७ बार पार्किंग की गई थी तथा ५ दिन हैंगर का उपयोग किया गया था। उसमें कैग ने पाया था कि ९ मई २०१४ से ३१ मार्च २०१५ तक इन कंपनियों से लागू दरों के अनुसार २८.५५ लाख की वसूली की जानी थी।
यह ब्यौरा तो मात्र सहस्त्रधारा हैलीपैड का ही है। इसके अलावा प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर हैलीपैड बने हुए हैं, उनका कोई भी ब्यौरा मांगने पर भी यूकाडा ने ऑडिट के लिए उपलब्ध कराना जरूरी नहीं समझा।

अन्य जगह यह है फीस

इसके अलावा प्रदेश में नैनी-सैनी (पिथौरागढ़), गौचर(चमोली), चिन्यालीसौड़(उत्तरकाशी) की हवाई पट्टियों पर भी वायुयान के लिए ५ हजार रुपए तथा हैलीकॉप्टर के लिए ढाई हजार रुपए लैंडिंग शुल्क रखा गया है। रुद्रप्रयाग के केदारनाथ घांघरिया के अलावा हर्षिल, बद्रीनाथ, खरसाली आदि के हैलीपैडों में प्रति लैंडिंग एक हजार रुपए फीस निर्धारित है।
इनके अलावा प्रदेश के किसी भी अन्य हैलीपैड पर लैंडिंग के लिए ढाई हजार रुपए प्रति लैंडिंग फीस निर्धारित की गई है। यदि उनका ब्यौरा भी खंगाल लिया जाए तो यह बकाया राशि काफी अधिक हो सकती है। यह हालत तब है, जबकि २३ जनवरी वर्ष २०१६ में तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमित नेगी ने यह कार्यालय आदेश निकाला था कि यदि कोई भी कंपनी उपयोग के एक सप्ताह के अंदर पार्किंग शुल्क यूकाडा में जमा नहीं कराएगी तो उन ऑपरेटर्स को उत्तराखंड राज्य में भविष्य के लिए लैंडिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह शुल्क वसूलने और ऑपरेटर्स को बिल आदि देने का दायित्व ऑपरेशन अनुभाग को सौंपा गया था।
गौरतलब है कि पहले यह सारे कार्य नागरिक उड्डयन विभाग संभालता था और उस पर शासन की भी पूरी निगरानी रहती थी, किंतु वर्ष २०१३ में उत्तराखंड नागरिक विकास प्राधिकरण (यूकाडा) का गठन कर दिया गया। इस प्राधिकरण को स्वायत्तशासी बनाते हुए नौकरशाहों ने लगभग सभी अधिकार दे दिए और एक तरह से इस पर उत्तराखंड शासन का नियंत्रण लगभग समाप्तप्राय हो गया है।
यही कारण है कि यूकाडा में मनमाने तरीके से खर्चे हो रहे हैं तो चुकाए जा रहे बिलों के सत्यापन की भी कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है। न ही हैलीपैडों और वायुयान के कलपुर्जों की अधिप्राप्ति के संबंध में प्रचलित नियमों का पालन किया जा रहा है।
जिम्मेदारी तय करने की कोई सटीक व्यवस्था न होने से कई बार यह देखने में आता है कि न तो यूकाडा अपने बकाये की वसूली तत्परता से कर पा रहा है और न ही अनुभवी पायलटों की सेवाएं लेने के लिए तय नियमों का पालन कर रहा है। कई बार उड़ान के लिए बिना अनुभव की कंपनियों की भी सेवाएं ले ली जाती हैं।

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