हाईकोर्ट का कार्बेट को लेकर कड़क फैसला

कमल जगाती,  नैनीताल 
उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने कॉर्बेट में पोचिंग के मामले में नाराजगी दिखाते हुए मुख्य सचिव से शुक्रवार दोपहर तक जंगली जानवरों की सुरक्षा के लिए किए जा रहे सभी उपायों पर विस्तृत जानकारी देने को कहा है। न्यायालय ने कॉर्बेट पार्क के कोर जोन में अवैध रूप से वर्षों से रह रहे वन गुज्जरों को विस्थापित करने के प्रयासों के बारे में भी सरकार से पूछा है।
       हिमालय युवा ग्रामीण विकास संस्था और पर्यावरण प्रेमी अनिल बलूनी की सन 2012 की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए आज न्यायालय ने वन्यजीव तस्कर(पोचार)और कॉर्बेट पार्क के कोर क्षेत्र में रह रहे वन गुज्जरों के बीच के गठजोड़ पर सुनवाई की।
 सरकार ने न्यायालय को बताया कि 241 गुज्जर परिवारों को विस्थापित किया जा चुका है, जबकि केवल 57 परिवारों को विस्थापित किया जाना बाकी है। उन्होंने न्यायालय को बताया कि वन गुज्जरों को कालागढ़ कोर जोन से चीला रेंज में विस्थापित कर दिया गया है। न्यायालय ने सरकार से पूछा है कि टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स कितने समय में बाघ को बचाने के लिए तैयार हो जाएगी !
 अनिल बलूनी के अधिवक्ता राकेश थपलियाल ने न्यायालय को बताया कि बाघ के शिकार में बालको बावरिया, गोपी और गामा गुज्जर आदि मुख्य रूप से शामिल हैं, क्योंकि एक बाघ के अंगों से 7 लाख से अधिक की रकम प्राप्त होती है।
 उन्होंने न्यायालय को ये भी बताया कि वन गुज्जर और पोचरों के बीच में वनजीवों के अंग बेचने को लेकर गठजोड़ है और ये पकड़े जाने के बाद बेल पर छूटकर दोबारा से वही काम शुरू कर देते हैं।

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