- करीब 19 साल जेल में रहने के बाद नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट से हुआ था बरी
- भूपतवाला में चाय की दुकान के पास फंदे से लटका मिला शव, पुलिस जांच में जुटी
हरिद्वार। 18 सितंबर। नीरज उत्तराखंडी
बहुचर्चित निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली ने शुक्रवार को हरिद्वार के उत्तरी भूपतवाला क्षेत्र में कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उसका शव सप्तसरोवर क्षेत्र में मिला। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आत्महत्या के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
करीब 19 वर्ष जेल में रहने के बाद कोली को नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निठारी कांड से जुड़े उसके अंतिम मामले में भी बरी कर दिया था। इसके बाद वह जेल से बाहर आया और हरिद्वार में रह रहा था। बताया जा रहा है कि वह पिछले कुछ समय से चाय की दुकान चला रहा था।
2006 में देशभर में मचा था हड़कंप
वर्ष 2005-06 में नोएडा के निठारी क्षेत्र से बच्चों और महिलाओं के लापता होने के मामले सामने आने के बाद सुरेंद्र कोली का नाम चर्चा में आया था। 29 दिसंबर 2006 को निठारी स्थित एक मकान के पीछे नाले से बड़ी संख्या में मानव अवशेष मिलने के बाद पूरे देश में सनसनी फैल गई थी। मामले की जांच बाद में सीबीआई को सौंपी गई और कोली के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हुए।
13 मामलों में हुई थी मौत की सजा
न्यायिक प्रक्रिया के दौरान कोली को निठारी कांड से जुड़े 13 मामलों में दोषी ठहराया गया और कई मामलों में मौत की सजा सुनाई गई। हालांकि, बाद की न्यायिक प्रक्रिया में उसकी दोषसिद्धियां लगातार पलटती गईं।
अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसे 12 मामलों में बरी कर दिया। इसके बाद एक मामला लंबित रह गया था। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम मामले में भी उसकी दोषसिद्धि रद्द करते हुए उसे बरी कर दिया।
बरी होने के दस माह बाद मौत
सुप्रीम कोर्ट से पूर्णतः दोषमुक्त होने के करीब दस महीने बाद हरिद्वार में उसकी मौत ने निठारी कांड को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। फिलहाल पुलिस आत्महत्या की परिस्थितियों और उसके पीछे की वजहों की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही मौत से जुड़े अन्य तथ्य स्पष्ट होंगे।
फैक्ट बॉक्स | निठारी कांड
– स्थान: निठारी, नोएडा
– मुख्य घटनाक्रम: 2005-06
– मानव अवशेष बरामद: 29 दिसंबर 2006
– जांच: सीबीआई
– कोली के खिलाफ मामले: 13
– 2023: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 मामलों में बरी किया
– नवंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम मामले में भी बरी किया
– 18 सितंबर 2026: हरिद्वार में आत्महत्या


